Saturday, August 4, 2018

पॉवर पॉइंट प्रेजेंटेशन



सुबह के साढ़े दस बजे हैं, भोजन लगभग बन गया है. मौसम आज अपेक्षाकृत गर्म है. सुबह स्कूल गयी थी, बच्चों को खेल-खेल में ध्यान कराया, अध्यापिकाएं असेम्बली में खड़ी नहीं होती हैं आजकल, प्रधानाचार्या के न होने से स्कूल में ऐसा होना स्वाभाविक है. कल रात बल्कि सुबह-सुबह स्वप्न में कितने चेहरे दिखाई दिए, शायद उसके पिछले जन्मों के चेहरे..कितनी बार वे इस पृथ्वी पर आ चुके हैं. कितना अच्छा हो, वे जन्म तो लें पर अपनी इच्छा से...स्वतंत्र हों कि कब और कहाँ उन्हें जन्मना है. आत्मा स्वतंत्र होना चाहती है, अपनी ख़ुशी के लिये वह किसी पर निर्भर नहीं है. देह को रखने के लिए कितने सारे प्रयत्न करने होते हैं, किंतु स्वयं को अभिव्यक्त करने के लिए देह तो चाहिए ही, मन भी. मन से परे जो वह स्वयं है उससे परिचय भी तो चाहिए. आज सुबह भी टहलते समय बीच-बीच में वे दौड़े, जून को भी अच्छा लग रहा है. वह कल शाम को कह रहे थे, कुछ दिनों के लिए छुट्टी चाहिए, उन्हें किसी आश्रम में जाना चाहिए कुछ दिनों के लिए.

पिछले दो दिन क्लब के कार्यक्रम के लिए पॉवर पॉइंट प्रेजेंटेशन बनाने में व्यस्त रही. परसों सुबह एक सखी ने आकर सहायता की, बताया, क्या होता है. जून ने एक बना-बनाया पीपीटी भी भेज दिया था देखने के लिए. दोपहर को जब सेक्रेटरी आई, तब तक कुछ उसका बनाया भी कुछ आकार ले चुका था. कल सुबह स्कूल से आकर नये सिरे से बनाना शुरू किया, काफी तस्वीरें डालनी अभी शेष हैं. आज दोपहर सेक्रेटरी फिर आने वाली है. कल उसके कहने पर एक नाराज सदस्या को फोन किया, उन वरिष्ठ सदस्या का क्रोध अभी तक कम नहीं हुआ है, वह सत्य सुनना ही नहीं चाहतीं, व्यर्थ ही दोनों परेशान हो रही हैं, ईश्वर सभी को सदबुद्धि दे. चार दिन बाद एक कार्यक्रम है, तब तक सभी के मन शांत हो जाएँ और मेल-मिलाप का वातावरण बन जाये. दो-तीन दिन पूर्व बिल्ली का जो बच्चा घर में आ गया था, अभी तक है, उसे दूध दिया, फोटो उतारी, अगले महीने तक रह जाये तो अच्छा होगा. बच्चे आने वाले हैं, उन्हें ख़ुशी होगी. जून की ट्रेनिंग आज भी है, सुबह गुरूजी को सुनकर उन्हें लोगों व परिस्थिति को स्वीकारने की बात समझ में आयी, अच्छा लगा उन्हें.

पिछले कुछ दिन व्यस्तता बनी रही, डायरी नहीं खोली. अभी छोटी बहन से बात हुई. उसने भतीजी का सामान भिजवाया भाभी को, पर उन्हें लगता है कुछ सामान अभी भी छूट गया है. लोग वस्तुओं को ज्यादा और व्यक्तियों को कम महत्व देते हैं, दुख का यह एक कारण हो सकता है. जीवन का हर पल कितना सुंदर है. आज सुबह जो निर्णय लिया कि उसे मन की छाया नहीं बनना है, बल्कि मन को उसकी छाया बनकर रहना है. मौसम बाहर बेहद गर्म है पर यहाँ अंदर सामान्य है. कल शाम को आंधी-तूफान आये थे पर वर्षा नहीं हुई. पूसी भी किसी कोने में छाया में बैठी होगी, लगता है जैसे वह उन्हें पहले से जानती है, शायद वर्षों पूर्व जो बिल्ली गुजर गयी थी, पुनः जन्म लेकर आई हो. उसकी एक पुरानी छात्रा की माँ का फोन आया, उसे अगले महीने कालेज में दाखिला लेना है, मनोविज्ञान ले या मास कम्युनिकेशन, अभी तय करना है. कुछ देर पहले बगीचे से गाजरें निकालीं, फोटो डाला व्हाट्सएप पर, कमेंट्स आने शुरू हो गये हैं, मोबाइल ने दूरियां घटा दी हैं. भोजन में भी कटहल बनाया है बगीचे से तोड़कर. आज छोटे भांजे का पेन ड्राइव से दिया हुआ एओएल का कलेक्शन देखा, गुरूजी के कई प्रवचन हैं, भजन हैं और भगवद गीता का आडियो भी. कई ध्यान की विधियाँ भी हैं, जून को भी अवश्य देगी आज. ब्लॉग पर आज की पोस्ट भी लिखी, सात वर्ष पूर्व वह मृणाल ज्योति की सदस्या बनी थी, समय तो जैसे पंख लगाकर उड़ता है. उस दिन जल्दी के कारण किचन के दरवाजे का जो शीशा टूट गया था, आज लग गया है. ‘सिया के राम’ देखने की जल्दी थी. राम को प्रेम करती है शूर्पनखा पर उसे अपमानित होना पड़ता है, उसी अपमान का बदला था सीता हरण. कई दिनों से कोई कविता नहीं लिखी, टिककर बैठना ही नहीं हुआ, अचानक कभी प्रेरणा मिलेगी, इस इंतजार में रही तो शायद लिखना हो ही न पाए ! मृणाल ज्योति के लिए भी लेख लिखना है.

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