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Wednesday, August 19, 2020

पद्मा सचदेव की कविता

 

सुबह के दस बजे हैं. नन्हा काम पर चला गया है. जल्दी में टिफिन नहीं ले गया. सोनू डन्जो से भेज देगी, ऐसा उसने कहा. यह एक नयी सेवा यहाँ आरम्भ हुई है, किसी का भी कोई भी सामान कहीं से भी कहीं पहुँचाना हो ऐप पर डाल देने से उनका आदमी ले जाता है और पहुँचा देता है. बाजार से कुछ मंगवाना हो तो वह भी सम्भव है. सभी के लिए उपयोगी है. आज शुक्र है, इतवार को फर्नीचर और सोमवार को पर्दे लग जाने के बाद सम्भवतः अगले हफ्ते वे नए घर में रहने जा सकते हैं. एओल के एक टीचर को गृहप्रवेश की पूजा के लिए आमन्त्रित करे ऐसा उसने सोचा है. मृणाल ज्योति की  वार्षिक सभा के लिए उसे संदेश लिखना था, जून ने सहायता की, शाम को सोनू भी देखेगी, कल तक वह भेज देगी. उसके दाएं गाल में एक छाला हो गया है,  ऐप से डॉक्टर से बात की, उसने रक्त जाँच की रिपोर्ट भी देखी, सब कुछ घर बैठे ही. कैल्शियम व विटामिन डी कम है. दवा भी लिख दी उसने जो घर बैठे आ भी जाएगी. नन्हे की कम्पनी काफी काम कर रही है समाज हित में. उड़ीसा, पश्चिम बंगाल व आंध्र प्रदेश में फनी तूफान कहर ढा रहा है. दस लाख लोगों को समुद्र तट से विस्थापित किया  गया है. लगभग दो सौ किमी प्रति घण्टा की रफ्तार से हवाएं चल रही हैं. देश में अभी चुनाव चल रहे हैं, विपत्ति तो बिन बुलाये ही आ जाती है. जैसे उसे स्वास्थ्य संबन्धी इतनी समस्याओं का एक साथ सामना करना पड़ रहा है. आज भी सुबह निकट की सोसायटी में टहलने गए व मंदिर के निकट प्राणायाम किया. दोपहर को नैनी नहीं आयी तो उसने बर्तन धोये और जून ने  झाड़ू लगाया.  अच्छा लगा कुछ काम करके, बाद में नैनी आयी तो उसे थोड़ा आराम हो गया. इस समय कुक खाना बना रहा है, उसने ढेर सारे पानी में चावल उबाले और बाद में पानी फेंक दिया, उसे कम पानी में चावल पकाने नहीं आते. 


सुबह के नौ बजे हैं, आधे घण्टे में वे बाहर निकलेंगे. पहले हॉस्पिटल जहाँ जून को अपनी रिपोर्ट दिखानी है. फिर नए घर, जहाँ आज भी शायद ही कोई काम होगा. मजदूरों से काम करवाना इतना सरल नहीं है. घर के बाहर बहुत सारा कचरा सीमेंट, लकड़ी आदि पड़ा है  और सामने के लॉन में भी, जिसे साफ करवाना बहुत जरूरी है. बड़ा शहर हो या छोटी जगह, लोगों की मानसिकता नहीं बदलती, किसी भी काम को टालते रहना आम बात है. किन्तु उसे जगत जैसा है वैसा ही स्वीकारना है, व्यर्थ की माथा-पच्ची करने से कोई लाभ नहीं है. उन्हें अभी लगभग छह माह का समय असम में और बिताना है, इसके बाद अपने घर को चलाने की जिम्मेदारी उठानी है. बड़े घर के रखरखाव में कितना समय और ऊर्जा व्यय करनी होगी, भगवान ही जानता है. कल नन्हे ने नेटफ्लिक्स पर ‘तीन’ फिल्म लगाई, अमिताभ बच्चन का अभिनय शानदार है. 


उस दिन उस पुरानी डायरी के पन्ने पर गाँधी जी की लिखी सूक्ति थी- ‘झूठ इंसान को जलील कर  देता है.'  उसने लिखा, और वह कितनी बार झूठ बोल जाती है कभी स्वयं से कभी जग से. एक दिन पूर्व हमनाम देहली से आयी एक नई मित्र मिली, वह भी लिखती है. उसकी कुछ पंक्तियाँ पढ़ते हुए उसे अपना लेखन याद आ गया. आश्चर्यजनक रूप से समानता है उन दोनों के वाक्यों में. सम्भवतः प्रत्येक नवहस्ताक्षर की यही स्थिति होती हो, फिर भी यह मानना पड़ेगा कि वह इतनी दूर रहकर और नूना यहां रहकर किसी एक अदृश्य भावपुंज के आवरण से कभी न कभी अवश्य आवरित हुए होंगे. जेबी कृपलानी का कल देहांत हो गया. गांधी युग का एक और स्तम्भ ढह गया ऐसा नेता लोग कह रहे हैं किन्तु यह सही नहीं है ! ऐसा उसने लिखा तो पर कारण नहीं लिखा, जाने क्या रहा होगा मन में ! 

पद्मा सचदेव की एक कविता उसने अगले पन्ने पर लिखी है. बहुत प्यारी है. 


गुलमोहर से कहा मैंने आज मेरा नेग तो दो 

अपने फूलों से चुरा कर एक कलछी आग तो दो 


एक कलछी रूप तो दो एक कलछी रंग तो दो 

इक जरा सी रौनक  इक जरा सा संग तो दो 


जिंदगी की गठरी में आग बुझती जा रही है 

धीरे धीरे जीने की अब साध चुकती जा रही है 


चांदनी को कहा मैंने एक चम्मच खांड तो दो 

तेरे घर बिखरी पड़ी है एक चुटकी ठंड तो दो 

इक जरा सी चांदनी इक जरा सी लौ तो दो 

कसम से मैं ढाप कर रखूंगी हरदम दो तो दो 


जिंदगी की आँखों में आँधी सी छ रही है 

चमक कर फिर खुलने की आदत मरती जा रही है 


सागर को कहा मैंने एक चुल्लू पानी तो दो 

सबके घर में आती है पानी की कमी ए दोस्त 

आँखों में जब गंगा जमुना थी तो तेरी जरूरत न थी 

तुम्हारा घर जो भरा हुआ है मेरे घर भी कोई कमी न थी 


जिंदगी की साँझ है दरिया चुकता जा रहा है 

ओट में होते होते लुकता-छिपता जा रहा है 


हसरतों को कहा मैंने दहलीज के बाहर जाओ 

पर्वत की चोटी हो जाओ या सिल की पत्थर हो जाओ 


जवान होकर बेटियाँ ससुराल भी तो जाती हैं 

छाती पर सिल की तरह वो भी न रह पाती हैं 


जगह जगह आक का इक पौधा उगता आ रहा है 

फूलों के बीज ये दिन रात चुगता जा रहा है 


गुलमोहर से कहा मैंने आज मेरा नेग तो दो 


Tuesday, February 19, 2019

आंधी और तूफान



कल वे वापस घर असम पहुंच गये. यहाँ तो बरसात का मौसम जैसे आरम्भ हो ही गया है. परसों रात्रि से ही लगातार वर्षा हो रही है. बंगाली सखी से बात हुई, आज उसके विवाह की वर्षगांठ है, उसने बुलाया तो नहीं है पर वे अवश्य जायेंगे. अभी एक और पुरानी सखी से बात हुई, उसने कहा, उसकी बिटिया ने घर के कार्यों में दिल से भाग लेना शुरू कर दिया है. उसे नन्हे का सहयोगी स्वभाव बहुत अच्छा लगा. बच्चे देखकर ज्यादा सीखते हैं.

सुबह वे उठे तो बगीचे में चारों ओर पत्ते बिखरे हुए थे, जो रात की आंधी की खबर दे रहे थे. लंच के बाद जून जब चले गये तो बहुत दिनों बाद अयोध्या काण्ड में आगे लिखना आरम्भ किया. दोपहर को थोड़ी देर थमने के बाद संध्या पूर्व वर्षा फिर आरम्भ हो गयी थी. शाम को जब योग कक्षा चल रही थी, आंधी और तूफान के कारण कुछ देर के लिए बिजली भी चली गयी. एक योग साधिका के दांत में दर्द था, अन्य के सिर में, उसने उन्हें विश्राम करने को कहा. निरंतर योग साधना करने से एक दिन अवश्य ऐसा आता है जब छोटे-मोटे रोग इसमें बाधा नही बनते. उसके बाद क्लब जाना था, मीटिंग थी, पाक कला की प्रतियोगिता थी, वायलिन वादन, नृत्य तथा एक पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन भी. अभी-अभी छोटे भाई से बात की. नन्हे की शादी में आने के लिए अभी से टिकट करवाने के लिए बिटिया से कह रहा है. इस समय रात्रि के साढ़े आठ बजे हैं. बाहर बगीचे से एक पक्षी की ध्वनि निरंतर सुनाई दे रही है, जैसे जाप कर रहा हो.

आज प्रातः भ्रमण को गये वे तो हवा में ठंडक थी और खुशबू भी. दो हफ्तों बाद स्कूल भी गयी, बच्चों को योग करने में और उसे कराने में आनन्द आता है. स्कूल में नई प्रिंसिपल आई हैं. कल इतवार को भी लॉन में बच्चों ने कुछ आसन किये और भजन गाये. आज सुबह पड़ोसिन के यहाँ गयी. उनकी बेटी व दामाद से भी मिलना हुआ, उन्हें फूल तथा अपनी पुस्तक भेंट की. दोपहर को लेखन. परसों दोपहर से जून उदास थे, कल दोपहर बाद तक मन में एक उहापोह सी रही. आज मन ठीक है उनका. कल उन्हें दो दिन के टूर पर जाना है.

तीन दिनों का अंतराल, जून देहली गये तो उस दोपहर देर तक लिखती रही. कल वे वापस आ गये. खाने-पीने के सामान के साथ तीन कुर्तियाँ भी लाये हैं उसके लिए. माया से छूटने का कोई क्या उपाय करे. परमात्मा नित नये बंधन में बाँध रहा है. कल रात को इस समय की भांति तेज वर्षा हो रही थी. जून जोर-जोर से खर्राटे ले रहे थे. उसकी नींद खुल गयी, सुबह सिर भारी था. एक दिन पूर्व किसी ने मस्तक पर अगूँठे का स्पर्श करके जगाया था, इसके बाद एक दिन एक स्पष्ट ध्वनि सुनी, ‘निकल’ और नींद खुल गयी. एक दिन ध्यान करते समय कोई साथ-साथ श्वास ले रहा था. कितने रहस्य छुपे हैं उनके चारों ओर. सुबह सद्गुरू को सुनती है, दिन का आरम्भ कितना सुंदर होता है. आजकल कविता जैसे रूठ गयी है !

Friday, April 4, 2014

आंधी और तूफान


पिछले दो-तीन दिनों से वह ‘महिलाओं के लिए लेखन’ पुस्तक पढ़ती रही है पर प्रश्नोत्तर लिखने बैठी तो बात आगे नहीं बढ़ रही है. आज पड़ोसिन ने अपने घर आने का निमन्त्रण दिया है शाम को वह उन्हें क्लब भी ले जाएगी. क्लब में फिल्म है. उसे लेडीज क्लब की तरफ से पुराने वस्त्र एकत्र करने का काम सौंपा गया है, दोपहर को एक परिचित महिला आयीं कुछ वस्त्र लेकर, वह सामान्य वस्त्रों में थी, उसे उलझन में देखकर शायद..कुछ देर रुककर ही वह चली गयीं. जून होते तो वह इस समय ‘हिंदी कक्षा’ में होती, घर से बाहर निकलना कुछ करना अच्छा लगता है उसे. उसने सोचा उस सखी ने अच्छा निर्णय लिया, कामकाजी महिला की समस्याएं भी कम नहीं होतीं पर जीवन है तो समस्याओं से घबराना कैसा. फ़िलहाल तो वह अपनी मर्जी की जिन्दगी अपने तौर पर जी रही है. कहीं नौकरी करने का एक अर्थ गुलामी स्वीकार करना भी होगा, उसका वक्त उसका नहीं रहेगा, मन का चैन...उसे लगा शायद मन का चैन बढ़ जाये ? आखिर घर से बाहर जाना काम करना अच्छा लगता है !

जून का फोन आज सुबह आया, उसे लगा, उनकी आवाज में उदासी की छाप थी, पहले की तरह उत्साह से भरी आवाज नहीं थी, शायद उन्हें घर की याद आने लगी है. वे भी तो उनका इंतजार कर रहे हैं, उनकी उपस्थिति की यहाँ बहुत आवश्यकता है. मिलने वाले सभी सोचते हैं कि वे अकेले हैं और सदा ही सहायता करने की अपनी इच्छा व्यक्त करते हैं और वह अपने स्वभाव के अनुसार किसी पर, किसी भी तरह से निर्भर होना नहीं चाहती.

It is 2 pm Nanha went for computer class in rain taking an umbrella, he is such a nice, energetic and lively person. He remains happy all the time these days busy in his project work, computer and watching TV cheerfully. He remembers papa often and always asks about phone calls he made.

Jun has come back but he is not well. Yesterday when he entered the house his face was totally white and very week. He was suffering from fever since last few days and he did not tell her. He wanted to save them from suffering so he suffered alone. She did not like it but appreciated his love for them. Today he went to dept but came back around 10, now taking rest. Nanha is busy doing his work, only fifty present of which is done till now. Yesterday was last meeting of the out going committee. Secretary asked her to stay for photo session but she had to come back with jun and Nanha they were waiting for her in lounge.

आज अगस्त का प्रथम दिन है, वर्षा सुबह से थम-थम कर हो रही है. शाम को वे तीनों बाजार गये उनके देखते-देखते ही काले घने बादल छा गये पहले आंधी शुरू हुई फिर वर्षा. वे किसी तरह कार तक पहुंचे और घर आये. जून अभी पूरी तरह स्वस्थ नहीं हुए हैं. किसी भी बात का जवाब हाँ, हूँ या कम से कम शब्दों में देना पसंद करते हैं. घर जाकर अस्वस्थ हो जाना उन्हें रास नहीं आया, किसी को भी नहीं आएगा. पिछले शनिवार को उसने एक कहानी शुरू की थी जो अभी तक अधूरी है.

Today she got up before 5, her student came and solved the questions she gave her, she was suffering from cold as usual, then at six jun and Nanha awoke, they ate breakfast and jun went to office, Nanha was writing today's news, but it seems he is again asleep. She is not feeling cheerful this morning. Last night they came back from a friend’s party at 10 pm, food was good but something went wrong when she gave flowers to him, they all felt awkward perhaps she should not take flowers for them ever. Nanha is reading one novel by Ian Flaming it also disturbs her but she should keep one thing in mind that one is responsible for her/his state of mind and should not brood over petty things, but should overcome them as soon as they come.


कल दिन भर वह नन्हे को उसके कार्य में सहायता करने में व्यस्त रही. शाम को जून अपने पुराने मूड में आ गये थे, खुशदिल और ऊपर तक प्रेम से लबरेज. उनकी तबियत अब जाकर पूरी तरह ठीक हुई है. उनका जन्मदिन इसी महीने आने वाला है, उसे उनके लिए उपहार लेना है. आज सुबह से कुछ भी सार्थक नहीं किया है  सिवाय अख़बार में काश्मीर में पुनः बढ़ती हुई हिंसा के समाचार पढ़ के. हाँ, पत्रों के जवाब के साथ पहली बार एक अंग्रेजी पत्रिका का क्रॉसवर्ड भी भर कर भेजा. कुछ देर Kane and able भी पढ़ी, हिंदी फिल्मों की तरह कहानी में जाने-पहचाने मोड़ आते हैं, लगभग समाप्त हो गयी है किताब पर उसे अच्छी नहीं लगी बहुत, सीधी सपाट किताब है.  

Tuesday, March 11, 2014

नये स्कूल में पहला दिन


आज का इतवार कुछ अलग है, जून सुबह नौ बजे ही नाश्ता करके निकल गये, दो बजे लौटे. नन्हा यहीं पडोस में किसी के यहाँ पिकनिक पर गया है. मौसम आज गर्म है, कुछ देर पूर्व कुछ बूँदें पड़ीं फिर थम गयीं. कल दोपहर भर और सुबह भी नन्हा टेनिस खेलता रहा, धूप से चेहरा लाल हो गया पर जोश कम नहीं था. वह DPS जाने के लिए तैयार हो गया है, अब कुल मिलाकर बीस बच्चे हो गये हैं जो यह से जायेंगे.

कल फिर उड़ीसा और बंगाल के तटवर्ती इलाकों में तूफान आया सो यहाँ भी बदली फिर छाई है, उन्हें थोड़ी देर बाद दिगबोई के लिए निकलना है, नन्हे की फ़ीस जमा करनी है, ड्रेस व किताबें खरीदनी हैं. कल से वह स्कूल जाएगा. सुबह उसे उठाया तो अपने खराब मूड में था, शायद नींद से उठाने पर बच्चों का ऐसा ही मूड रहता हो, शायद उन्हें सपनों से जगाया जाना नागवार गुजरता हो. वह सुबह-सवेरे ही उस पर झुंझला गयी, कुछ देर वह उदास रहा फिर सामान्य हो गया. कल से उसे और भी जल्दी उठाना होगा, देखें क्या होता है, कहीं उनकी सुबहें करुण दृश्यों से न भर जाएँ ! कल शाम उसने नन्हे को संज्ञा के भेद, उदाहरण आदि पढाये, जाने से पूर्व सर्वनाम भी पढ़ाना है. उसने देखा है, अक्सर उसके जबड़े एक दूसरे पर दबाव डालते हैं. तनाव ग्रस्त होने पर ऐसा होना स्वाभाविक है, पर सामान्य अवस्था में भी ध्यान न देने पर ऐसा हो जाता है. शायद नींद में भी ऐसा होता होगा. नींद में तरह-तरह के विचार एक के बाद एक मन में आते हैं. जिनका आपस में कोई तारतम्य नहीं होता न ही कोई अर्थ निकलता है. ध्यान किये हफ्तों बीत गये हैं. नन्हे के DPS जाने पर सुबह वक्त मिल सकेगा.
आज नन्हा पहली बार अपने नये स्कूल में नई कक्षा में बैठा होगा, सुबह वह पांच बजे उठी, सवा  पांच बजे उसे उठाया और साढ़े छह बजे तक ही जून और वह दोनों तैयार थे. आज उसका रिजल्ट भी निकलने वाला है. पड़ोस का बच्चा ले आएगा. उसकी कुछ किताबें नहीं मिली हैं, स्वेटर भी बाजार बंद होने के कारण नहीं मिला. कल शाम वह पुराना गृह कार्य करता रहा. रात वे जल्दी सो गये ताकि सुबह तरोताजा होकर जल्दी उठ सकें. नन्हे का स्कूल का अनुभव ही बतायेगा कि उनका उसे दिगबोई भेजने का निर्णय सही है या गलत. आज जून को अपना पेपर प्रस्तुत करना है. इतवार को उन्हें बाहर जाना है. आज कृष्णामूर्ति की पुस्तक में पढ़ा कि जीवन में क्रम स्वयंमेव आना चाहिए प्राकृतिक रूप से, ऊपर से थोपी हुई कोई भी वस्तु स्वाभाविक नहीं होती और न ही उसका असर होता है. प्रत्येक मानव यदि अपने स्वाभाविक रूप में रहे तो द्वंद्व पैदा ही न हो.

कल नन्हे का रिजल्ट आया और जैसी कि उन्हें उम्मीद थी वह अपने सेक्शन में प्रथम आया है. वैसे वह इससे भी अच्छा कर सकता है, कल उसका पहला दिन अच्छा रहा, शाम को आया तो खुश था, कल से कई लोगों ने बधाई दी है, कुछ लोग पूछते हैं कि नन्हे को DPS में दाखिला कैसे मिला आदि. उनकी ख्वाहिश थी कि उसे अच्छे स्कूल में पढ़ायें सो ईश्वर ने पूरी कर दी है. आज बहुत दिनों बाद उसने पीटीवी पर एक ड्रामा देखा, दिल को छू जाते हैं भोले भाले किरदार, अपने बेहद अपने लगते हैं. आज सुबह उसने ‘रामकुमार भ्रमर’ की एक कविता रजनी बाला पढ़ाई, उस छात्रा को अपनी लिखी एक कविता भी दिखाई. पिछले पूरे हफ्ते वह DHC के लिए नहीं पढ़ सकी. अर्थात हिंदी लेखन के कोर्स के लिए.  




Friday, August 3, 2012

चाइनीज ब्यूटीशियन


उनका पत्रिका-क्लब आरम्भ हो गया है. सा. हिंदुस्तान और सारिका आयी हैं, अभी तो कितनी पत्रिकाएँ आयेंगी, ठीक से पढ़ सके इसके लिये दोपहर को सोने का मोह छोड़ने होगा. क्लब से दो पुस्तकें भी लायी है एक बागवानी पर और दूसरी हाउस कीपिंग पर है. जीनिया के पौधे निकल आये हैं. क्यारी में लगाने हैं, गुलदाउदी की कटिंग्स भी लगायी हैं, देखें जड़ पकड़ते हैं या नहीं अगले साल के लिये. उसे अपनी बंगाली मित्र का स्मरण हो आया, जिससे बहुत दिनों से नहीं मिली और जो बागवानी में बहुत रूचि रखती है, उसे जानने की उत्सुकता हुई कि उसने अपने लॉन में क्या लगाया है. नन्हे के स्वेटर का गला खोल कर फिर से बनाया पर बात बनी नहीं, रहीम दास ने कहा है न, टूटे से फिर न जुड़े, जुड़े गांठ पड़ जाये. आज से वह फ्रिज के लिये क्रोशिये का कवर बनाना शुरू कर रही है. नन्हे को कल शाम जून ने डांटा, गुस्से में वह यह भी भूल गए कि वह उनकी बात समझ भी रहा है या नहीं, काश, वह आगे कभी ऐसा न करे.

कल रात बड़े जोरों की वर्षा हुई आंधी और तूफान के गर्जन-तर्जन के साथ, बिजली चली गयी, और अब पानी नदारद है. सुबह-सुबह पानी न हो काम कैसे चलेगा, गनीमत है थोड़ा बहुत पानी तो घर में रहता है फिल्टर में और गर्म पानी तो आता ही है. परसों वे तिनसुकिया गए, मौसम बिल्कुल ही साथ न दे तो बात दूसरी है वरना तिनसुकिया में शिव मंदिर तक जाना एक अच्छा अनुभव है. वह एक चाइनीज ब्यूटीशियन के पास भी गयी, वे लोग कई पीढ़ियों से भारत में बसे हुए हैं, आराम से स्थानीय भाषा बोल रही थी, जबकि आपस में वे चीनी में ही बोल रहे थे. जून ने एक नई मिठाई खरीदी, बहुत स्वादिष्ट थी. कल उसकी पड़ोसिन घर जा रही है एक महीने के लिये, शाम को वे उनसे मिलने जायेंगे.

कल सुबह वह जून से परसों रात की बात पर नाराज क्या हुई कि सभी काम बिगड़ने शुरू हो गए, नन्हें ने अपने कपड़े गंदे कर लिये और वह स्नानघर में थी, जल्दी-जल्दी बिना पोंछे उल्टा गाउन पहन कर बाहर आयी, धुले हुए कपड़े तौलिए सहित नीचे गिर गए, गनीमत है सूखे फर्श पर ही गिरे थे. जब तक वह नन्हे के कपड़े बदले महरी ने सभी नीचे गिरे कपड़ों को मैले कपड़े समझ कर पानी की तरफ खिसका दिया और तभी नन्हें ने पानी अलग गिरा दिया गैलरी में जल-थल हो गया, झटपट झाड़ू से सफाई की कि कहीं वह गिर न जाये...ऐसे में लिखने का समय ही नहीं मिला.