Thursday, April 23, 2026

माँ की बातें

 
माँ की बातें 


आज नूना ने डायरी उठायी तो कन्नड़ा भाषा का गृहकार्य याद आ गया। सोचा, आज की दिनचर्या को ही छोटे वाक्यों में लिखेगी, फिर उनका अनुवाद! 

“आज सुबह वे चार बजे उठे। उसके बाद टहलने गये। रास्ते में नीला आकाश देखा।घर आकर उन्होंने योग किया। उसके बाद सुबह की चाय पी। स्नान करके पूजा की। नौ बजे नाश्ता किया। फिर जून से कुछ लोग मिलने आये। नूना ने एक कन्नड़ फ़िल्म देखी।अब वह लंच तैयार करेगी। बारह बजे वे ध्यान करेंगे। एक बजे लंच खाएँगे। उसके बाद कुछ देर विश्राम करेंगे। तीन बजे कन्नड़ा कक्षा है। शाम को वे साइकिल चलायेंगे। वापस आकर ध्यान और पूजा करेंगे। आठ बजे रात्रि भोजन लेंगे। सोने से पहले कोई किताब पढ़ेंगे।”  


इवत्तू बेलिगे अवरु नाल्कू घंटेगे एक्करवादारू। अदारा नंतरा अवरु नादेयालु होदारू।दरियाल्ली अवरु नीलीआकाशवन्नु नोडीदारू।मनेगे हिंदीरुगिदा नंतरा अवरु योगाभ्यास माड़ीदारु।नंतरा अवरु बेलिगे साह सेविसदारु। स्नाना माड़ीदा नंतरा अवरु तम्मा प्रार्थनेगलनु माड़ी दारू।ऑम्बटू घंटेगे अवरु उपहारा सेविसदारु। नंतरा केलावारू  जुनिंदा भेटियागलु बंदारू।नूना कन्नड़ा सिनिमा नोडीदारू।ईगा अवलु उटावन्नू सिद्धापड़ीसुत्ताले।  हन्नेरेआदु घंटेगे अवरु ध्यान माड़ूत्तारे।ओंदू घंटेगे उटा माड़ूत्तारे।नंतरा स्वल्प समया विश्रांति पादेयुत्तारे।मुरु घंटेगे कन्नड़ा तरागति  इरुत्तादे। संजे अवरु साइकलिंग होगुत्तारे।हिन्दीरुगिदा नंतरा अवरु ध्यान माड़ी तम्मा प्रार्थनगलानु  माड़ूत्तारे।अवरु एंटू घंटेगे भोजना माड़ूत्तारे।मालगुवा मोदालू अवरु पुस्तकवन्नू ओदूत्तारे।


वर्डल खेल उसे अब बहुत रोचक लग रहा है। शिक्षिका की तबियत ठीक नहीं है, इसलिए आज कन्नड़ा कक्षा नहीं हुई। महादेव की कहानी बहुत रोचक हो गई है। नारायण को निघस ने निगल लिया है और महादेव धरती के मध्य भाग में तपस्या के लिए चले गये हैं। आज उनकी नई कार के लिए शेष राशि का भुगतान कर दिया गया।शीघ्र मिल जाएगी।जून को इंटरनेट बैंकिंग में दिक्क्त हो रही थी, इसलिए आज सुबह वे एसबीआई बैंक गये थे।वहाँ से लौटे तो जैसे मन की ऊर्जा जैसे घट गई थी, वहाँ के वातावरण के असर से अथवा पिछले दिनों हुए घटनाक्रम के कारण।लेकिन ध्यान करने के बाद मन सामान्य हो गया। शाम को संतों के वचन पढ़े, अनमोल है एक-एक शब्द ! संत न हों तो यह धरती रहने लायक़ ही न बचे। 


समाचारों में सुना, रुस और यूक्रेन का युद्ध चलता ही जा रहा है, इतना विनाश झेलने के बाद भी यूक्रेन को समझ नहीं आ रहा।देवघर में रोपवे के हादसे में फँसे लोगों को बचा लिया गया है। पाकिस्तान में नये प्रधानमंत्री शाहनवाज शरीफ बने हैं, पर कश्मीर का राग वह भी आलाप रहे हैं। रामनवमी के अवसर पर कई जगह हिंसा हुई है, कट्टरवादी लोगों के कारण ही देश का माहौल बिगड़ रहा है। 


नन्हे को आज सुबह व्हाट्सएप पर संदेश भेजा, अभी उसने देखा नहीं है, बहुत ज़्यादा व्यस्त है या चिंतित। ख़ैर ! ईश्वर उसे शक्ति देगा। नूना आजकल शारदा माँ के जीवन पर आधारित 'माँ की बातें’ पुस्तक पढ़ रही है। कितनी महिमावान थीं वह ! शिष्यों के दिल का हाल पहले ही जान जाती थीं। ऐसी दिव्य आत्माएँ अमर हो जाती हैं। आज भी कल्याण में संतों के वाक्य पढ़े, देह भाव से मुक्त होकर सूक्ष्म शरीर में स्थित होना है, फिर कारण शरीर में और अंत में आत्मा में। आत्मभाव में स्थित हुए बिना दुखों की आत्यंतिक निवृत्ति नहीं हो सकती। परमात्मा के प्रति पूर्ण समर्पण हुए बिना यह संभव नहीं है। 


शाम होते-होते वर्षा होने लगी है, जैसे सावन ही आ गया हो। आज नन्हे का संदेश आया।सोनू की मॉम की आँख में कुछ समस्या हो गई है, वह अगले हफ़्ते यहाँ आ रही हैं। सुबह ‘जिन सूत्र’ की व्याख्या सुनी। आज महावीर जयंती है और अंबेडकर जयंती भी। महादेव में शिव की अपार करुणा के दर्शन हुए, पुत्र लोहितांग के लिए अभी भी उनके मन में आशा शेष है।   


आज दोपहर वे पहली बार नन्हे के दफ़्तर गये। उसने फ़ोन पर बताया था कि शनि - रविवार को वह बाहर जा रहा है, इस बार नहीं आ पाएगा। उसके बाद घर जाकर सोनू के साथ भोजन किया। शाम को उसे व मौसेरे भाई-बहन को लेकर वे घर आ गये।


आज भी शाम से वर्षा होने लगी। रात्रि भ्रमण छूट गया। शाम को सोनू व दोनों बच्चों को उनके घर छोड़कर वे आश्रम गये। सुबह समय पर उठे, छत पर सभी ने मिलकर योग साधना की। नाश्ते में जून स्थानीय शेफ़ के यहाँ से इडली ले आये थे। लंच में कढ़ी-चावल बनाये। नन्हे से व्हाट्सएप पर बात हुई। शाम को एक सखी का फ़ोन आया, वह करेले का चोखा बनाने की विधि पूछ रही थी। छोटी बहन आर्ट ऑफ़ लिविंग की पत्रिका ‘ऋषिमुख’ के बारे में, वह टीटीसी करना चाहती है, आर्ट ऑफ़ लिविंग का टीचर ट्रेनिंग कोर्स। 


आज सुबह उसने जून को ध्यान का महत्व एक बार फिर बताया, दिन में दो बार ध्यान भी किया।मन कितना शांत है, ध्यान जीवन की अनमोल निधि है। वे स्वयं शांति के स्रोत होते हुए भी अशांत रहें, इससे ज़्यादा मूर्खता क्या होगी ! आने वाला सप्ताह उनके लिए शुभ हो और देश के लिए भी। कल रात दिल्ली में हनुमान जयंती के जुलूस में हिंसा हुई, जैसे रामनवमी के अवसर पर कई राज्यों में हुई थी। 


आज सुबह नन्हा यात्रा से लौट आया है, वजन घटा कर आया है, सोनू ने बताया।आज सुबह वे टहल कर आये तो सफ़ेद पेठे का रस पीया। अच्छा लगा, हल्का मीठा व ठंडा। 


आज नयी एक्सयूवी ७०० आ गई है। नीलिमा लिए हुए काले रंग की है। जून ने एक बार चलायी, पर उन्हें इतनी बड़ी गाड़ी चलाने का अभ्यास नहीं है। नन्हा और सोनू गाड़ी लेकर यहाँ आये, काफ़ी देर बैठे पर किसी न किसी काम ने व्यस्त रहे। नन्हा डाइटिंग पर है, वह आजकल दिन में एक बार ही भोजन करता है। मिठाई के दो डिब्बे लाये, अगले हफ़्ते उसे गुरुपूजा में जाना है, ले जाएगी। सुबह उठने से पूर्व एक स्वप्न देखा, जिसमें जून थे, ट्रेन भी थी, नन्हा भी था, छोटा सा, उसके पैरों में मिट्टी लगी है, और कंकड़ चुभे हैं, वह साफ़ कर रही है। सोनू ने कहा, कुछ बातों में नन्हे की सोच अलग है, जो स्वाभाविक भी है। हरेक अपना जीवन अपने आदर्शों और मूल्यों के अनुसार ही जीता है।


आज देवों के देव में लोहितांग की कथा समाप्त हो गयी। वह मंगल ग्रह के रूप में आज भी अंतरिक्ष में स्थित है। आज सुबह जून ने नयी  कार में सोसाइटी का एक चक्कर लगाया। नन्हे ने कहा है, परसों कार का डेमो देने कोई आएगा। 


सुबह अति सुंदर सूर्योदय की तस्वीर उतारी। खुली हवा में बैठकर साधना की। मन एक पल के लिए भी यदि परेशान होता है तो ज्ञान से संभल जाता है, ज्ञान जो मूर्त रूप होकर भीतर रहता है, गुरु, आत्मा और परमात्मा के रूप में ! जून भी आजकल शांत रहते हैं, उलझन उन्हें होती भी है तो समाधान मिल ही जाता है। दोपहर को अनुवाद कार्य किया। वे गुरुपूजा से लौटे तो नन्हा अपने मित्र के साथ गाड़ी लेने आया। उसे अगले दिन अपने मित्रों के साथ ड्राइव पर जाना था। 


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