Monday, April 27, 2026

‘अ सर्च इन सीक्रेट इंडिया’

‘अ सर्च इन सीक्रेट इंडिया’

आज सुबह दस बजे वे नन्हे की नई गाड़ी में यालाहंका में कंपनी की ‘ओल्ड बॉयज़ मीट’ में शामिल होने गये।वे कई परिवारों से वर्षों बाद मिले, बहुत अच्छा अनुभव रहा।सभी लोगों ने अपनी यादों में असम को बसाया हुआ है। जब सभी असम में रहते थे, तब अक्सर ही मिलना होता था। एक ही कंपनी में काम करना व एक ही कैंपस में रहना, सबके पास साझा करने के लिए जैसे यादों का एक ख़ज़ाना था।कार्यक्रम एक अंध विद्यालय के हॉल में हुआ। विद्यालय की प्रधानाचार्य भी मिलीं। एक अतिथि ने ‘प्राणिक हीलिंग’ पर एक वक्तव्य भी दिया तथा प्रयोग द्वारा एक महिला के हाथ के दर्द का इलाज भी किया। केले के पत्ते पर पारंपरिक भोजन भी परोसा गया। लौटे तो शाम हो गई थी। कार्यक्रम के दौरान नन्हे ने कई तस्वीरें भी खींचीं। घर आकर कंपनी की कॉफी टेबल बुक ‘नॉस्टेलज़िया’ एक बार फिर उल्टी-पलटी, बहुत अच्छी लगी। कितनी ही नयी बातें पता चलीं, जो वास्तव में पुरानी हैं। 


नन्हे ने कल जो तस्वीरें खींचीं थीं, उनके लिए कई लोगों ने तारीफ़ की है। उसने पूरे दिल से यह काम किया था।आज शाम को गुरुजी का एक भाषण सुना, जो उन्होंने ‘वी स्टैंड फॉर पीस’ पर  संयुक्त राष्ट्र संघ में दिया। उन्होंने कहा, शान्तिप्रिय लोगों को एकजुट होना होगा। किसी को भी अपने कर्त्तव्य से विमुख नहीं होना है।दोपहर को गुरुजी का कराया ध्यान ‘नीडिल’ किया और शाम को मन को ख़ाली करने वाला, दोनों ही विधियाँ प्रभावशाली हैं। आज पढ़ा, गुरु के आवाहन के बाद उसके ज्ञान स्वरूप में मन को विलीन करने से मन की शुद्धि होती है, रामकृष्ण परमहंस की पुस्तक तो अनमोल है। स्वामी विवेकानंद जब नरेन थे, कितना संदेह था उनके मन में, पर उनके गुरु उनकी किसी बात का विरोध नहीं करते थे। अनोखे लोग थे वे! आज उसने एक पोस्ट लिखी। जैसे कोई फूल खिलता है, कोई उसे सराहे या नहीं, इससे क्या अंतर पड़ता है फूल को ! शब्द जो किसी के मन से निकले, अंततः तो समष्टि मन से ही आये हैं ! 


दोपहर को उसने जून को एक बात पर टोका, पर आज उन्होंने बुरा नहीं माना। महादेव में पार्वती पुन: शिव से पृथक हो गई हैं, उन्हें एक और जन्म लेना होगा, फिर वे बाणासुर का वध करेंगी। कितनी अद्भुत कथा है शिव-पार्वती की। सृष्टि के आदि में देव तथा दानव दोनों ही हुए। इसलिए अच्छी व बुरी, शुभ व अशुभ दोनों शक्तियाँ इर्द-गिर्द होती हैं। चुनाव उन्हें करना है। देवता परम चेतना की उर्मियाँ हैं तो दानव उनसे बनने वाली छाया। अहंकार छाया ही तो है, आत्मा आलोक है। कुछ पाने की, कुछ बनने की, कुछ होने की लालसा जब तक बनी है, तब तक मन में पूर्ण तृप्ति कैसे हो सकती है ? जो मानव का मूल स्वभाव है, यदि वही उसका लक्ष्य है तो, वह तो मानव अभी है ही, फिर कैसी खोज? 


आज उन्होंने पहली बार सुबह-सुबह खीरे का रस पिया, अच्छा लगा और उसका परिणाम भी अच्छा रहा।आज स्वामी मधुसूदन सरस्वती के बारे में सुना, जो पन्द्रहवीं शताब्दी में हुए थे। वह वेदांती होने के साथ कृष्ण भक्त भी थे। भक्ति के बिना ज्ञान रूखा-सूखा ही रह जाता है, तभी तो ‘ब्रह्म सत्यम जगत मिथ्या’ कहने वाले शंकराचार्य भी ‘भज गोविन्द गाते हैं। आजकल उसका लेखन कार्य, विशेषतया कविता लेखन का कार्य पहले की भाँति नहीं हो रहा है। मन की धारा शांत हो गई है, और लेखन तो भीतरी उहापोह को दिखाने का ही एक माध्यम है शायद ! 


आजकल नूना पॉल ब्रंटन की पुस्तक ‘अ सर्च इन सीक्रेट इंडिया’ पढ़ रही है। यह एक ऐसी यात्रा पर आधारित है, जिसमें  लेखक सच्चे ऋषियों की खोज में लगा है। ऐसे ऋषि जिनके पास आत्मा का ज्ञान है, जिन्होंने अपने भीतर उस सच्ची शांति का अनुभव कर लिया है, जिसे भौतकितावादी लोग मानने से भी इंकार कर देते हैं।इसी किताब में एक यहूदी व्यक्ति का ज़िक्र है जिसने कुछ अच्छे जिन्नों को वश में कर लिया था, जो दूसरों के विचारों को भी पढ़ सकते हैं और बिना किसी को दिखे कहीं भी जा सकते हैं। नूना को कई बार लगता है, देवदूत उसके भी आसपास हैं। कभी दिव्य गंध का अनुभव होता है, कभी संगीत का, कभी सुंदर दृश्यों का, शायद उन्हीं के कारण ! शाम के भ्रमण के समय बादल थे, तेज हवा उन्हें उड़ा ले गई। थोड़ी सी जमैका चेरी तोड़ी। विपासना ध्यान किया पर अब उस तरह का ध्यान उसे नहीं भाता, केवल संवेदनाओं के प्रति जागरूक रहने से राग-द्वेष तो मिट सकते हैं, पर देह भाव से मुक्ति नहीं मिलती। कोई आत्म अनुभव नहीं होता, जहाँ पूर्ण शांति हो, कोई भाव, विचार या संवेदना भी न रहे ऐसी विश्रांति ही उसे भाती है। पंचदशी को आगे सुना। यह भी चौदहवीं शताब्दी का स्वामी विद्यारण्य का लिखा वेदान्त का एक ग्रंथ है। साथ ही इसमें त्रिपुर सुंदरी की उपासना का मंत्र भी दिया गया है, यानि भक्ति और ज्ञान दोनों ! 


आज सुबह बगीचे में काम करने के बाद वे आश्रम गये। समूह में सुदर्शन क्रिया का अभ्यास किया। बाद में महादेव में गणेशजी की पत्नी सिद्धि के पुत्र क्षेम तथा ऋद्धि के पुत्र लाभ की कथा सुनी। महादेव उन्हें गोद में लेकर अति प्रसन्न हैं।दोपहर बाद नन्हा आया, उस समय तेज वर्षा हो रही थी। रह-रह कर बिजली चमक रही थी। श्वेत बींस की सब्ज़ी बनायी थी उसने। रिलायंस ट्रेंड्स होते हुए वे नन्हे के साथ उसके घर गये। सबके लिए उपहार ख़रीदे। डिनर के बाद वे वापस लौटे तो घर के बाहर ही मात्र दो हफ़्ते पुरानी, नयी कार का टायर पंक्चर हो गया। नन्हे ने भीगते हुए यू ट्यूब से सीखकर टायर निकाला तथा स्टेपनी लगायी। जून ने तब तक एक मकैनिक को भी बुला लिया था।उसके बाद बच्चे वापस चले गये, अभी तक उनके घर पहुँच जाने का संदेश नहीं आया है।  


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