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Sunday, July 5, 2020

समर स्मारक

पिछले तीन दिन पता नहीं कैसी व्यस्तता बनी रही. देश में तनाव का वातावरण है. कल सुबह भारतीय मिराज विमानों ने पाकिस्तान में घुसकर आतंकवादी ठिकानों पर बम बरसाए. आज सुबह उनका जहाज भारत में घुस आया. युद्ध जैसे हालात हो गए हैं. पता नहीं कल का सूरज क्या लेकर आएगा. प्रधानमंत्री की रात कैसे बीत रही होगी, पता नहीं. देशवासियों की शुभकामनायें उनके साथ हैं. जून कल गोहाटी गए हैं, आज एक सहकर्मी के पुत्र के विवाह में जायेंगे. अभी कुछ देर पूर्व नन्हे से बात हुई, देश के हालात ही चर्चा का मुख्य विषय थे. उसने बताया, कल या परसों से नए घर में पेंटिंग का कार्य आरंभ हो जायेगा. वे अप्रैल या मई में वहाँ जायेंगे. आज सुबह पिताजी से बात हुई, मुख्यतः वही बात थी.  ईश्वर सभी को सदबुद्धि दे और युद्ध टले.  
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विंग कमांडर अभिनंदन पाकिस्तान में फंस गए हैं. 
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विंग कमांडर अभिनंदन आज पाकिस्तान से लौट रहे हैं. 
भारत पाकिस्तान सीमा पर गोली-बारी जारी है. कल विंग कमांडर के वापस आने पर पूरे भारत में जश्न का माहौल था. लोग शहीदों की मृत्यु का दुःख कुछ भुला पाए हैं. आज नयी प्रेसीडेंट की अध्यक्षता में महिला क्लब की पहली मीटिंग हुई. एक वर्ष के अंदर वह और नई प्रेसीडेंट भी चली जायेंगी, फिर कोई और कमान संभालेगा। पिताजी से बात हुई, वह घर पर अकेले थे, भाई परिवार सहित घूमने गया है, उसके दामाद का जन्मदिन है. 

टीवी पर दिल्ली में बने समर स्मारक को दिखाया जा रहा है. जहाँ आजादी के बाद से अब तक शहीद हुए 26000 सैनिकों के नाम लिखे हैं. पाकिस्तान से भारत का अनेक बार युद्ध हो चुका है, वह कश्मीर को लेना चाहता है और भारत कश्मीर को अपना अटूट अंग मानता है. संभव है आने वाली पीढ़ियाँ इस बात को समझें और एक दिन वहाँ शांति हो जाये. 

जियें तो सदा उसी के लिए यही अभिमान रहे यह हर्ष 
निछावर कर दें हम सर्वस्व हमारा प्यारा भारतवर्ष 

आज वर्षों के बाद ‘हम लोग’ देखा. दोपहर को बच्चों को शिव का चित्र बनाना सिखाया, कल शिवरात्रि है वे आर्ट ऑफ़ लिविंग सेंटर जायेंगे. 

उस डायरी में उस दिन की सूक्ति थी - संघर्षों से भागना ही कायरता है. जब पढ़ा तो लगा जैसे सारा माहौल ही बदल गया हो. दिन भर वह खुश रही पर एक हल्की सी कसक रही इस बात की, कि इस ख़ुशी के पीछे क्या बात है ! कल अंतिम बार कालेज जाना है, फिर तो फीस जमा करने या प्रवेश पत्र लेने ही जाना होगा उसके बाद परीक्षा देने. कल दादाजी से मिलने भी जाना है, चचेरी बहन प्रतीक्षा करती होगी. सुबह जल्दी उठी, घूमने भी गयी, सबसे अच्छे पल होते हैं वे सुबह की उजली-उजली हवा में सूरज के आगमन की प्रतीक्षा करना और फूलों से गुफ्तगू करना. न कोई चिंता न फ़िक्र. हर रोज सुबह आती है उसे मालूम कहाँ था ! 

Friday, February 22, 2019

मिजोरम की चोटियाँ



दो दिनों का अन्तराल, जून गोहाटी गये हैं कल. उन्हें जून के पूर्व मुख्य अधिकारी को विदाई भोज के लिए घर पर बुलाना है. शनिवार को उन्हें निमंत्रित करने गये पर वे लोग शायद शहर से बाहर गये थे. दोपहर को उसने बगीचे से तोड़ी ब्रोकोली के चावल बनाये और शाम को कच्चे केले की सब्जी. इस वर्ष भी सर्दियों की सब्जियां इतनी हो रही हैं कि महीनों से वे आलू, प्याज, टमाटर, खीरा आदि के अतिरिक्त बाजार से कुछ नहीं खरीद रहे हैं. कल एक सखी के यहाँ से योगानन्द जी की एक पुस्तक मिली, गॉड टॉक्स विथ अर्जुन, अच्छी है. उनके भीतर निरंतर युद्ध चल रहा है. आत्मा और अहंकार के मध्य. अहंकार है देहभान तथा आत्मा है कृष्णभान. सारा दारोमदार इस बात पर है कि इस युद्ध में कौन जीतता है. सामने नीला आकाश है और उस पर श्वेत बादल, हवा बह रही है, जिसका स्पर्श सुखद है और सुखद है देह के भीतर तरंगों का स्पर्श भी !

सुबह से बादल बने हैं पर बरस नहीं रहे हैं. तीन दिन फिर किन्हीं व्यस्तताओं में गुजर गये. आज शाम को तीन परिवारों को रात्रि भोज पर बुलाया है. काफी काम हो गया है, थोड़ा शेष है. कुछ कार्य जून को करना है, कुछ नैनी को. आज सिलापत्थर  में एक बंगाली समूह ने असम के छात्र संघठन के दफ्तर पर हमला किया, उसी के विरोध में असम  बंद का एलान किया गया है. काफी दिनों से असमिया-बंगाली शांति से रह रहे थे, अचानक यह बदलाव कहाँ से आ रहा है. तीन दिन बाद होली है. उसने सोचा, वे आज ही होली भोज का आयोजन कर रहे हैं. अगले हफ्ते उन्हें मिजोरम की यात्रा पर निकलना है.

सुबह पौने छह बजे वे असम से रवाना हुए थे. सवा आठ बजे फ्लाईट डिब्रूगढ़ के मोहनबारी हवाईअड्डे से चली और पौने दस बजे कोलकाता पहुंची. जहाँ तीन घंटे प्रतीक्षा करने के बाद दोपहर एक बजे स्टारलाइंस-एयर इंडिया के विमान ने आइजोल के लिए उड़ान भरी. हवाईअड्डे पर कई मिजो लड़के-लडकियाँ थे, सभी काफी प्रसन्न, जरा उनसे नजरें मिलाओ तो मुस्कुराने को तैयार ! छोटी सी फ्लाईट थी लगभग पचास मिनट की, ऊपर से सैकड़ों मीलों तक फैली हरियाली से ढकी पर्वतों की श्रृंखलायें दिख रही थीं, एक के बाद एक पहाड़ों की चोटियाँ, घाटियाँ नहीं के बराबर. दोपहर दो बजे वे मिजोरम के लुंगपेई हवाईअड्डे पर पहुंचे, जहाँ कई सुंदर छोटे-छोटे बगीचे फूलों से भरे थे. बाहर निकले तो हर तरफ वृक्षों की कतारें. शहर से काफी दूर है हवाईअड्डा, लगभग सवा घंटा पहाड़ों के सान्निध्य में छोटी सी पतली सड़क पर यात्रा करने के बाद कम्पनी के गेस्ट हॉउस पहुंचे. यह हल्के हरे रंग से रंगी चार मंजिला इमारत है. रास्ते में बांसों के झुरमुट और फूल झाड़ू के पेड़ बहुतायत में दिखे. दो तीन जगह पिकनिक स्पॉट जाने के मार्ग बताते बोर्ड दिखे. स्वादिष्ट नाश्ता करके शहर घूमने निकले. पूरा शहर या कहें पूरा प्रदेश ही पहाड़ियों पर बसा है, सडकें ऊंची-नीची हैं, कहीं-कहीं तो खड़ी चढ़ाई है, लेकिन यहाँ के ड्राइवर इतने अभ्यस्त हैं कि ऐसी सड़कों पर आराम से वाहन चला लेते हैं. उसने एक पारंपरिक मिजो ड्रेस खरीदी. यहाँ के लोग कुत्तों से बहुत प्रेम करते है. एक महिला को देखा स्कूटर पर एक कुत्ते को शाल में लपेटे ले जा रही थी, जैसे कोई अपने बच्चे को ले जाता है. याद आया, एक मिजो लड़की यात्रा में उनके निकट बैठी थी, जो हैदराबाद में ब्यूटी पार्लर में काम करती है, अब छुट्टियों में घर जा रही थी. उसने बताया था, मिजोरम में कोई स्ट्रीट डॉग नहीं होता. सडकों पर महिलाएं और बच्चे ज्यादा नजर आ रहे थे, सभी प्रसन्न मुद्रा में.

Sunday, November 25, 2012

युद्ध की अनिवार्यता...?



मौसम बेहद ठंडा है, दस डिग्री होगा तापमान, दोपहर को नन्हे को सुलाते सुलाते उसे भी नींद आ गयी, सुबह अमृता प्रीतम की नई किताब ‘कोई नहीं जानता’ पढ़ती रही, उसे लगा इस कहानी पर टीवी सीरियल बनाया जा सकता है. पत्र लिखने का काम शुरू नहीं हो पाया. पहले पड़ोस की एक माँ-बेटी मिलने आयीं, जिन्हें चिवड़ा-मटर खिलाया उसने फिर शाम को उसकी छात्रा आ गयी, जून के न रहने पर सोनू बार-बार कुछ न कुछ पूछने या उसके पास आ जाता था . दोपहर को बहुत दिनों बाद उसने पंजाबी कढ़ी बनायी दही वाली, ठीक सी ही थी पर बहुत अच्छी नहीं. पंजाबी गीत भी सुने उसने बहुत मीठे हैं, गजलें अभी ध्यान से सुनी ही नहीं, यूँ ही काम करते करते ...कुछ खास नहीं लगीं..शायद शब्दों को ध्यान से सुनकर अर्थ समझे तो ज्यादा लुत्फ़ आए.

जून ग्यारह बजे आए, उससे पूर्व वह अपने दायें तरफ वाली पडोसिन से आज सुबह हुए दुखद हत्याकांड पर बात कर  रही थी. जून भी इसी कारण आये थे. असम के भूतपूर्व मंत्री के भतीजे के घर जाकर गोलियों से निर्मम हत्या, राष्ट्रपति शासन होते हुए भी सम्भव हो पाई. लेकिन हत्यारे पकड़े जायेंगे, बचेंगे नहीं. आतंकवाद कितनी गहरी जड़ें जमा चुका है हमारे देश में, निर्दोष लोगों की हत्या..? आज नेता जी का जन्मदिवस है, कहाँ हैं उन जैसे लोग, आज तो अपने ही लोगों पर गोली चलाने वाले क्रान्तिकारी कहलाते हैं.  उसके सामने यहाँ यह दूसरी हत्या है, घर में जाकर पत्नी के सामने पति को गोलियों का शिकार बनाना..कैसे पत्थर दिल होते हैं वे लोग..कैसा करुण चीत्कार होगा उस महिला का जिसकी आँखों के सामने उसका जीवन नष्ट हो रहा हो. आज और कुछ भी लिखने का मन नहीं करता, जून आते समय अस्पताल से देखकर आए, सर के पीछे से खून तब तक निकल रहा था. खून कितना सस्ता हो गया है, कब बंद होगा यह सिलसिला. लड़ाईयां बढती जा रही हैं. इसराइल स्कड मिसाइल से किया हमला कितना निर्मम है. अमेरिका के बम भी बगदाद में कितनो की जानें ले चुके होंगे और सिपाही.. उनके तो जन्म ही शहीद होने के लिए हुए हैं.

बहुत दिनों के बाद आज वे लोग पैदल शाम को सात बजे के बाद घर से निकले. जून कर तलप में ही छोड़ आए हैं, सर्विसिंग करानी है. निकट ही एक कन्नड़ परिवार के यहाँ गए, उन्हें बैठे हुए दो मिनट भी नहीं हुए थे कि सामने नारियल के लड्डू और नमकीन रख दी उन्होंने, अपना-अपना रिवाज है. लड्डू अच्छे बने थे, गृहणी कुछ दिनों बाद घर जा रही हैं, शायद ले जाने के लिए बनाये होंगे.

उसने फिर सिलाई-कढ़ाई के अधूरे काम को छोडकर एक और किताब पढ़ी, ‘आक के पत्ते’, उसके गौतम का दुःख आँसू बनकर उसकी आँखों से बहने लगा था. कितनी गहरी चोट लगी थी उसको...इतनी चोट खाए बिना कोई कैसे लिख सकता है वह सब, जरूर अमृता प्रीतम ने भी ऐसी ही पीड़ा को सहा होगा. उसकी जिंदगी में तो सुख ही सुख चाहा है उसने..सुख, आराम, सुविधा,...मन की शांति, स्थिरता..थोड़ी सी भी पीड़ा उससे सही नहीं जाती...पर कभी कभी थोड़ा सा भी दुःख विशाल लगने लगता है उसके साथ भी यही हुआ है. कई बार ऐसा हुआ है..अब भी तो बीती कड़वीं बातें सोचने बैठ जाये तो मन कैसा रोना-रोना हो जाता है. जब याद ही इतनी तकलीफदेह है तो..उस समय क्या स्थिति रही होगी.



प्रिय ब्लॉगर साथियों,  मैं बनारस व बैंगलोर की यात्रा पर जा रही हूँ, अब दिसंबर के तीसरे सप्ताह में मुलाकात होगी. आने वाले वर्ष के लिए तथा क्रिसमस के लिए अग्रिम शुभकामनायें...