डाक्टर देवेंद्र वोरा की लोकप्रिय पुस्तक ‘हेल्थ इन योर हैंड’ में नूना ने आज पढ़ा, थायराइड ग्लैंड के कम या अधिक सक्रिय होने पर शरीर में क्या-क्या लक्षण हो सकते हैं।अंगूठे के नीचे उसका एक्यूप्रेशर बिंदु है, जिसे दबाकर भी इस ग्रंथि को ठीक किया जा सकता है। जून ने ब्राज़ील नट्स भी लाकर दिये हैं।
’कश्मीर फ़ाइल्स’ से पूरे देश में सवाल उठ रहे हैं, उस समय के मुख्यमंत्री ने ऐसे क़ानून बनाये थे कि विस्थापित वापस ही न आ सकें।दोपहर को दो हफ़्ते बाद कन्नड़ भाषा की कक्षा हुई।कल दो वाक्य लिखकर लाने हैं।छोटी बहन का फ़ोन आया, वह एक चित्र बना रही थी, जिसे बहनोई जी अपने रेस्तराँ में लगायेंगे।वह अपने जॉब से छह महीने का अवकाश ले रही है। मई में उसे अमेरिका भी जाना है। यूक्रेन युद्ध की व्यर्थता पर उससे कुछ बात हुई। आज वर्षों बाद रेडियो पर एक नाटक सुना।सुबह एक कविता को संवारा, फ़ेसबुक पर पोस्ट किया। इन दिनों रात की रानी अपने पूरे शबाब पर है, घर के आगे व पीछे दोनों जगह ही। आज सुबह दस बजे से शाम पाँच बजे तक पानी नहीं था, टैंकर से तीन बाल्टी पानी लिया। सोसाइटी में पानी की समस्या बढ़ती जा रही है।
अभी-अभी समाचारों में सुना पश्चिम बंगाल में हिंसा की वरदातें बढ़ती जा रही हैं। राजनीतिक हत्याएँ भी हो रही हैं। कश्मीर फ़ाइल्स पर विवाद बढ़ता जा रहा है, पर लोग इसे देख भी रहे हैं। उन्होंने सोचा है, विवेक अग्निहोत्री की अन्य फ़िल्में भी देखेंगे। छोटे भाई का फ़ोन आया, उसने बताया, सन् अट्ठासी में वह बैंक में ऑडिट करने कश्मीर गया था।एक अन्य सहकर्मी के साथ किश्तवाड़ में एक रात के लिए एक होटल में रुका था। रात को भीड़ चिल्लाती हुई आयी और उनके कमरे का दरवाज़ा पीटती रही। उन्होंने दरवाज़ा बंद करके उसके सामने बेड लगा दिया और उसके ऊपर मेज़-कुर्सी भी रख दी और बिल्कुल चुप होकर बैठे रहे। एक घंटा तक दरवाज़ा पीटने के बाद वे लोग चले गये। होटल का मालिक पैसे लेकर पहले ही चला गया था। सुबह साढ़े तीन बजे वे वहाँ से निकल पड़े और तीन-चार घंटे पैदल चलने के बाद उन्हें ऊधमपुर की बस मिली। उसके बाद वह तीन-चार दिन मँझले भाई के यहाँ बीमार होकर रहा था।मंझला भाई उस समय ऊधमपुर में पोस्टेड था।’कश्मीर फ़ाइल्स’ देखकर उसे सारी बातें याद आ गयीं। उस समय बैंक में हिंदू अधिक थे, मुस्लिम कम थे। अभी कुछ दिन पहले वह फिर ऑडिट के लिए गया तो इस बार हिंदू एक भी नहीं था, पर उन्होंने काफ़ी ख़ातिरदारी की।
आज सुबह वे टहलकर आये तो नूना का एक पुराना संस्कार जगा, जून को एक बात के लिए टोका, पर थोड़ी ही देर में सब सामान्य हो गया। जैसे सागर में एक लहर उठी हो और फिर गिर गई हो। स्वामी विरूपाक्ष की लिखी पुस्तक द टाइगर पॉज़ आ गई है।कितनी हिंसा का सामना करना पड़ा तमिलों को भी, दुनिया में आज तक न जाने कितने लोगों को विस्थापित होना पड़ा है, और आज भी हो रहे हैं ।शायद विस्थापन से बड़ा दुख कोई नहीं।
आज सुबह ‘अड्डा’ पर हिन्दी-कन्नड़ा भाषा को लेकर लोगों का विवाद चल रहा था। सोसाइटी में कुछ लोग नई एजेंसी के आने से भी सहमत नहीं हैं। भविष्य में क्या होगा, कोई नहीं जानता।जून ने आज सुबह छतों की सफ़ाई करवायी। वहाँ रखे बेंत के फ़र्नीचर की पॉलिश भी करवायी। गैरेज को भी एसिड से साफ़ करवाया। दोनों साइकिलों की सर्विसिंग भी हो गई। मेहमानों के स्वागत के लिए पूरा घर तैयार है। पहली तारीख़ को जून ने एक पुराने सहकर्मी अपनी पत्नी के साथ तीन दिनों के लिए आ रहे हैं। आज उन्होंने ‘बुद्धा इन ए ट्रैफ़िक जाम’ देखी, जो अर्बन नक्सल की बात करती है।
कल रात बल्कि आज सुबह नूना ने अलार्म बजने से पहले एक अद्भुत स्वप्न देखा, जिसमें उसे परम विश्राम की अनुभूति हुई। ऐसा विश्राम जो जागते, सोते, ध्यान करते या किसी भी समय आजतक अनुभव नहीं किया था। पूर्ण आश्वस्ति का भाव, पूर्ण सुरक्षा तथा पूर्ण तृप्ति तथा पूर्ण संतुष्टि सब को मिला दें तो जो भाव होगा, ऐसा ! । उसकी स्मृति ही दिन में कई बार मन को विश्रांति से भरती रही। परमात्मा के चरण कमलों पर उसका सिर है और इतनी आत्मीयता और इतना अपनापन है कि कोई लज्जा या कोई दूरी नहीं है। भक्ति का परम भाव या पराकाष्ठा का अनुभव था। सामीप्य, सायुज्य या सान्निध्य से भी ऊपर ! जैसे कोई शिशु माँ के पास सुरक्षित महसूस करता होगा। ऐसा प्रेम तो कभी किसी के प्रति अनुभव में नहीं आया। कल गुरुजी के प्रेम पर लिखे लेख का अनुवाद किया था। प्रेम तभी प्रकटता है जब उसे प्रकट होना चाहिए। शायद कल ही वह दिन था। ईश्वर के प्रति विश्वास तो पहले से ही दृढ़ था पर अब उसमें एक नया रस घुल गया है। अब वह निकटतम है। उससे जरा भी दूरी नहीं है। उसने नूना को वैसे ही स्वीकारा है जैसी वह है ! आज भी हो सकता है स्वप्न में उसका संग साथ मिले!
कल रात दो स्वप्न देखे, एक में एक छोटा बच्चा था और दूसरे में एक संबंधी को देखा। अवचेतन में कितनी बातें होती हैं, जो स्वप्न के माध्यम से प्रकट होती हैं। इससे मन में निर्मलता आती है, स्पष्टता होती है।आत्मा की शक्ति जगाकर ही कोई लक्ष्य तक जा सकता है। आज राम नवमी के लिए लेख का अनुवाद किया। रामायण हरेक के भीतर प्रतिपल घट रही है। जून आज सुबह नौ बजे गये और एक बजे लौटे, पुरानी कमेटी के साथ लंबी बातचीत हुई।
आज का दिन और आने वाला पूरा सप्ताह जून और उनकी टीम के लिए काफ़ी चुनौतीपूर्ण रहने वाला है।आज सुबह टहल कर आये तो अभी दिन नहीं निकला था, आकाश पर चंद्रमा उसी आकार में था जैसा शिवजी के मस्तक पर होता है। रात्रि भ्रमण के समय पार्क-५ के पास गुलाबी फूलों वाला पेड़ बहुत ही सुंदर लग रहा था। हज़ारों फूल खिले हैं और सैकड़ों नीचे गिरे हैं। नन्हा व सोनू आठ बजे आ गये थे। वे लोग जिस जिग्सा पजल को बना रहे थे, आज पूरा करके उसे फ़्रेम में लगाया और दीवार पर ड्रिलिंग करके लगा भी दिया। नन्हे की आँख में धूल का एक कण भी चला गया, डॉक्टर को दिखाने गया था। यू ट्यूब पर नूना ने आचार्य कुंद कुंद की पुस्तक ‘समय सार’ की व्याख्या सुनी। अद्भुत ग्रंथ है यह, व्याख्याकार उससे भी ज़्यादा अद्भुत हैं।इतने भाव से अपनी बात कहते हैं कि सीधे दिल तक उतर जाती है।
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