Monday, May 18, 2026

रात की रानी


रात की रानी

आज का इतवार बच्चों के साथ बिताया। सोनू का भाई आया था, उसकी मॉम भी, नन्हे का मित्र आया, सभी मिलकर पहले ‘उडुपी’ गये, फिर एक कैंपिग साईट ‘कैंप मोंक’ देखने, लंच के लिए एमटीआर। शाम को वे लोग मैच देखकर वापस चले गये। भारत विश्वकप के सेमी फ़ाइनल में पहुँच गया है, उधर पाकिस्तान भी। शायद फ़ाइनल में दोनों के मध्य मुकाबला हो। पापाजी से बात हुई, उन्हें तीनों उपहार मिल गये हैं। 

आज शाम टहलने गये तो स्वच्छ नीले आकाश पर चाँदी सा चमकता चंद्रमा शोभित हो रहा था। कल पूर्णिमा है, देव दिवाली और गुरुपर्व भी। पापाजी का जन्मदिन भी, उनके लिए कविता लिखी है। कल चन्द्र ग्रहण भी है। सुबह नाश्ते में उसने साबूदाने की उपमा बनायी थी। नयी खुली सब्ज़ी की दुकान से पपीता ख़रीदा। शाम को हिंदी की कक्षा में साहिर-लुधियानवी का लिखा गीत “साथी, हाथ बढ़ाना” पढ़ाया। साहिर का नाम आते ही अमृता प्रीतम का ख़्याल भी आ जाता है अपने आप।   


आज सांध्य भ्रमण के समय चन्द्र ग्रहण देखा। सुबह उगते हुए सूरज का एक सुंदर चित्र उतारा था। जून आज दो बार साइकिल से बाज़ार गये। तीन तरह के साग लाए। वह आजकल पुन: जीवन में गहरी रुचि लेने लगे हैं, प्रेम का रंग चढ़ा है शायद। किसी कोरियन धारावाहिक का अंतिम एपिसोड देख रहे हैं वे, उसमें सच्चे प्रेम को बहुत श्रेष्ठता से दर्शाया गया है।वह आजकल घर के काम में बहुत मदद करने लगे हैं, उसे पढ़ने-लिखने का समय ज़्यादा मिल जाता है, यह भी ईश्वर की कृपा है ! उस दिन महर्षि अरविंद के एक अनुयायी से सुना था, जो लोग नियमित ध्यान करते हैं, उनकी शारीरिक उम्र भले ही बढ़ जाये पर उनकी कोशिकाएँ देर तक युवा रहती हैं। मन जिस बात को स्वीकार कर लेता है, वैसा ही प्रभाव शरीर पर पड़ता है। नन्हा शनिवार को गोवा जा रहा है, अपने मित्र की बैचलर पार्टी में। 


अभी कुछ देर पहले ही वे रात्रि भ्रमण से आये हैं, मौसम सुहावना था, हवा शीतल और सुवास भरी , जो गुलाबी ठंड पड़ने की खबर दे रही थी। दूर आकाश में धुएँ के बादल  थे, जो वहाँ रहने वालों के लिए मुश्किल पैदा कर रहे होंगे, और हो सकता है थोड़ी देर में हवा उन्हें यहाँ तक ले आये,  वहाँ कोई सीमा तो है नहीं। जो लोग यह धुआँ पैदा कर रहे हैं, खुद वे भी भुगत ही रहे होंगे, पर वे इस बात को समझते नहीं, महसूस नहीं करते। आज भी महर्षि अरविंद व श्रीमाँ के बारे में सुना, उनका विजन कितना विशाल था, गुरुजी की तरह वे भी सारे विश्व के लिए सोचते थे। गुरुजी आजकल अमेरिका में हैं, करोड़ों लोगों के जीवन को उन्होंने छुआ है। उसे भी अपनी शक्ति व सामर्थ्य के अनुसार सेवा कार्य में लगना चाहिए। पापाजी ने भी देश और दुनिया के लिए बहुत मंगलकामनाएँ ज़ाहिर किन। छोटे भाई का भुज से फ़ोन आया, कह रहा था, यहाँ  चालीस लाख में ज़मीन सहित डुप्लेक्स घर मिल जाता है, कितना खुला-खुला है वह इलाक़ा! उसने ‘भारत’ के बारे में एक पोस्ट प्रकाशित की; भारत, जो दुनिया को जोड़ने का प्रयास कर रहा है। 


आज महाकवि दिनकर की पुस्तक में महर्षि अरविंद के कविता के बारे में कहे गये विचार पढ़े। वह अपने जैसे एक ही हुए हैं, उनके पूर्व किसी ने पूरी मानव जाति के आध्यात्मिक होने की बात नहीं कही है। उनका ज्ञान अथाह है, कोई एक व्यक्ति उसे पूरा समझ नहीं सकता। छोटी भांजी का जन्मदिन था, कल उसे बहुत आश्चर्य हुआ जब शाम को उसके दफ़्तर के लोग घर पर मिले, माँ ने बिना उसे बताये, एक पार्टी का आयोजन किया था, अगले महीने उसका विवाह होने वाला है। ईश्वर उसे सारी ख़ुशियाँ दे। कुछ देर पहले बायें तरफ़ के पड़ोसी का पुत्र आया था जन्मदिन का केक लेकर, उसका व उसकी माँ का जन्मदिन भी आज है। उन्हें भी फ़ोन करके बधाई दी। परमात्मा ही यह सारे काम करवा रहा है, उसकी कुछ मीठा खाने की इच्छा भर हुई और केक हाज़िर था। सुबह ठीक छह बजे किसी ने कहा, छह बज गये।सुबह उठने से पहले अक्सर ठीक तीन बजकर अट्ठाईस मिनट पर वही नींद खोल देता है। वह उनके इतने क़रीब है पर वे उससे मुँह मोड रहते हैं। उस मन से काम लेते रहते हैं, जो अस्थायी है, जो सदा बदलता रहता है। भक्ति, प्रेम, ज्ञान, शांति, समरसता, आनंद जो भी उन्हें चाहिए, वह सब परमात्मा से ही मिलता है। उसे पहचानना और उसके प्रति स्वयं को खोल देना यही असली योग है ! सुबह एक नयी कविता लिखी। पापाजी से बात हुई उन्होंने ‘इस्मत चुगताई’ का एक नाटक विविधभारती पर सुना, उसकी कहानी बता रहे थे।वह उसका लेख पढ़कर भी आश्वस्त हुए कि मानव सब कुछ नहीं जान सकता। नन्हा गोवा में है, आज वे लोग क्रूज़ में हैं, कल वह वापस आयेगा। 


आज नेहरू जी का जन्मदिन है, भारत के पहले प्रधानमंत्री, जो हिंदू होते हुए भी स्वयं को हिदुओं की तरफ़ से बोलने वाले नहीं कहलाना चाहते थे। वह धर्म निरपेक्ष थे पर अन्य पंथों के लिए अति उदार।भारत को इतने वर्ष और तपस्या करनी थी और फिर अपने मूल स्वभाव की ओर लौटना था। शायद वक्त का यही तक़ाज़ा था। बचपन में चाचा नेहरू के लिए उन्होंने कितने नग़मे गाये थे, उनके भीतर अनेक अच्छाइयाँ थी, विज्ञान के बल पर वह देश को आगे ले जाना चाहते थे।बाल्मीकि रामायण पर लिखी उसकी पोस्ट पर कुछ लोगों ने प्रतिक्रिया की है, रामायण के प्रति लोगों में कितनी श्रद्धा है ! 


आज शाम मृणाल ज्योति की रजत जयंती पर निकलने वाली पत्रिका के लिए एक ऑन लाइन मीटिंग में भाग लिया। मीटिंग अच्छी रही, जैसे कि सब कुछ अच्छा है, यह दुनिया अच्छी है और वह इसलिए कि इस दुनिया को बनाने वाला अच्छा है ! आज रात की रानी पूरे शबाब पर है, मदहोश कर देने वाली ख़ुशबू है उसकी ! राहगीरों को अपनी सुवास से आकर्षित करती हुई सी।सुगंधित पौधे कितने जीवंत होते हैं, ऊर्जावान और परहित कारक । दोपहर को इंडोनेशिया के बार में एक वीडियो देखा, मोदी जी ने वहाँ रहने वाले भारतीयों को शानदार भाषण दिया। इस्लामिक देश होने के बावजूद वे रामायण और महाभारत को अब तक अपनाए हुए हैं। आज एक अफ़ग़ानी व्यक्ति का वीडियो देखा जो अपने ही मज़हब का सताया हुआ है। पूरे विश्व में धर्म के नाम हज़ारों लोग प्रताड़ित किये गये हैं, किए जा रहे हैं। आज सुबह जून गन्ने का रस पिलाने ले गये, दुकानदार ने पुदीना और नींबू का रस डालकर ताजा और स्वादिष्ट रस दिया। रुस और यूक्रेन का युद्ध अभी भी चल रहा है, शायद इसी वर्ष इसका अंत हो जाये और नया वर्ष नयी उम्मीदें लेकर आये। लाखों लोग पहले ही मारे जा चुके हैं इसमें !


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