Tuesday, May 5, 2026

स्पंद कारिका


स्पंद कारिका 


आज समाचारों में सुना राष्ट्रपति पद के लिए भाजपा की उम्मीदवार श्रीमती द्रौपदी मुर्मु जी हैं। पहली आदिवासी महिला, जो इतने बड़े पद तक पहुँचेंगीं। वह झारखंड की राज्यपाल रहा चुकी हैं और उड़ीसा विधान सभा में कई बार मंत्री पद भी संभाल चुकी हैं।छोटी बहन ने वापस जाकर आर्ट ऑफ़ लिविंग का पहला बेसिक कोर्स करवाने के लिए काम करना अभी से शुरू कर दिया है। पहले वह सहायक शिक्षिका के रूप में कोर्स करवाएगी, फिर कोड मिल जाने के बाद स्वतंत्र रूप से। दोपहर को उन्होंने यू ट्यूब पर एक आध्यात्मिक फ़िल्म देखी, जो अनोखे जीवों व प्राणियों से परिचय करवाती है। देह में आत्मा की उपस्थिति को सिद्ध करने के लिए बहुत अच्छी दलीलें देती है।शाम को वे सब एपिक रॉक गये, कुछ देर वहाँ बैठे जहाँ एक झरना बह रहा था। वर्षा के मौसम में झरनों में एकाएक पानी बढ़ जाता है।कल नन्हा सभी को मैसूर ले जाने वाला है।जहाँ छोटी बहन दो दिन अपने जेठ-जेठानी के पास रहकर वापस आएगी। 


आज बहुत दिनों के बाद अपने पुराने समय पर डायरी उठायी है। परसों की रात मैसूर के निकट स्थित एक हरे-भरे फ़ार्म हाउस ‘कैरिस ब्रुक’ में बिताकर, कल दोपहर का लंच मैसूर में करने के बाद वे शाम तक घर लौट आये।पापाजी से बात हुई, उसकी एक कविता पढ़कर कह रहे थे, दुनिया में सभी अपने-अपने काम में लगे हैं, भक्त व कवि भी इसी तरह अपने काम में लगे हैं। परमात्मा अनंत रूपों में स्वयं को प्रकट कर रहा है। मन संदेह करता है पर आत्मा सदा एक रस साक्षी मौजूद है, वह प्रेम, शांति व करुणा का सागर है, वही सत्य है।आज भी छात्राएँ हिन्दी पढ़ने आयी थीं, जिनकी मातृ भाषा हिन्दी नहीं है, उन्हें कितनी परेशानी होती है बोलने में, जैसे उसे कन्नड़ बोलने में होती है। 


आज का दिन कुछ अलग बीता, सुबह सब सामान्य था, टहलने गई तो पैरों में भारीपन लगा, शरीर में स्फूर्ति नहीं थी। योगासन भी पूरे नहीं हो पाये। नाश्ते के बाद टाइप करने बैठी तो शरीर अलसा रहा था। भोजन बनाया तो किसी छोटी सी बात पर मन झुंझला गया, कटु तो नहीं एक-दो शब्द तेज आवाज़ में निकले, जैसे कोई भीतर से स्वयं ही निकाल रहा हो। दिन भर कुछ नहीं खाया, रात्रि के समय कुछ भूख का अहसास हुआ। कर्मों के फल के रूप में भी कर्म होते हैं, यह आज जैसे स्पष्ट हो रहा था।जून शांति से सब देख-सुन रहे थे, उन्होंने कुछ प्रतिवाद नहीं किया।


आज दोपहर बारह बजे वे केंगरी रेलवे स्टेशन जाकर छोटी बहन को ले आये।उसने साड़ियाँ, सूट व कुर्ते दिखाये, जो मैसूर से लायी है। शाम को उन्होंने मिलकर बड़ी स्क्रीन पर वे सारे फ़ोटोज  देखे, जो पिछले कई दिनों से खींच रहे थे।उसके बाद सोने से पहले साधना, भजन, भोजन और रात्रि भ्रमण।  


आज जुलाई का प्रथम दिन है। आर्ट ऑफ़ लिविंग की नयी-नयी बनी शिक्षिका मोबाइल पर हैप्पीनेस कोर्स का मैनुअल पढ़ रही है। जून भी मोबाइल पर कुछ देख रहे हैं। शाम को वे नापा के पीछे वाली सड़क पर टहलने गये, जगह-जगह निर्माण कार्य शुरू हो गया है। पहले की सी शांति भी नहीं थी और न ही सफ़ाई! जून ढेर सारे फल लाए थे, ड्रैगन फ़्रूट, लंगड़ा आम और जामुन बहुत मीठे थे। पापा जी ने बताया, छोटा भाई बहरीन से लौट आया है। सुबह वे आश्रम गये थे। हर्बल टी लेने के प्रकरण में जून से उसकी बहस हो गयी, पर जल्दी ही स्मरण आ गया, आश्चर्य हुआ कि अभी भी आग्रह शेष है भीतर ! मन की हज़ार परते हैं, जिन्हें शायद भगवान भी नहीं जानते ! 


आज सुबह टहलने गये तो हवा ठंडी थी और आकाश पर चंद्रमा अपनी आभा बिखेर रहा था।जुलाई का महीना बैंगलोर का सबसे ठंडा महीना कहा जाता है। इसी महीने की तेरह तारीख़ को गुरु पूर्णिमा है।गुरुजी ‘स्पन्द कारिका’ पर बोलने वाले हैं। सोसाइटी में गणेशोत्सव का उद्घाटन समारोह है। दो माह तक ये कार्यक्रम चलेंगे। छोटी बहन को कल वापस जाना है।सुबह उसने साइकिल चलाने का अभ्यास किया।वर्षों पूर्व सेना में काम करते समय उसने साइकिल चलायी थी। पिछले दो हफ़्ते उन्होंने साथ बिताये। अच्छा लगा। शाम को वे नन्हे के यहाँ गये। 


आज से नूना स्वामी रामानन्द जी द्वारा पर दिया गया प्रवचन सुनना शुरू किया है। कुछ-कुछ समझ में आ रहा है।गुरु पूर्णिमा से पहले कुछ भूमिका तो तैयार हो जानी चाहिये मन में।यह नौवीं शताब्दी के कश्मीर शैव दर्शन का एक ग्रंथ है,जो वासुगुप्त द्वारा रचित शिव सूत्रों पर आधारित है । स्पंद का अर्थ है भगवान शिव की शक्ति के दिव्य कंपन, जिससे इस सृष्टि का उदय और विलय होता है। 


इस महीने चार रिश्तेदारों के जन्मदिन पड़ते हैं, वह सभी के लिए कविता लिखेगी। आज ट्रांसक्रिप्शन का कार्य भी आया। पापाजी आज गर्मी या उम्र के कारण थोड़ा सा परेशान थे, जो स्वाभाविक है। मधुमालती में पहली बार फूल लगे देखे। सहजन का पेड़ तेज हवा में गिर गया था, नापा का माली आकर उसे सहारा देकर सीधा कर गया है, पता नहीं बचेगा यह नहीं।जड़ें मज़बूत होंगी तो शायद बच जाये। सुबह छोटी बहन का फ़ोन आया, वह घर पहुँच गई है।वहाँ उसे गर्मी का अहसास हो रहा है, एक महीना वह बैंगलुरु के सुहाने मौसम में रहकर जो गई है। 


कल नन्हे ने बूस्टर वैक्सीन लगवा ली। थोड़ा बहुत साइड इफ़ेक्ट भी हुआ। आज भी ‘स्पन्द  कारिका’ सुना, मन में जैसी भावना होती है, परिणाम भी वैसा ही आता है। आत्मा तो सागर की तरह है, वे अपने मन को चम्मच जितना रखेंगे तो उतना ही समायेगा। यदि विशाल बनाएँगे तो उतना अधिक मिलेगा। यदि क्षीर सागर के साथ एक रूप हो जाएँगे तो वही बन जाएँगे। मानव अपने अनंत स्वरूप को भुलाकर स्वयं को उपाधि से जोड़कर व्यर्थ ही सुखी-दुखी होते रहते हैं। आनंद उनका स्वभाव है  और सत्य उनका स्वरूप ! 


आज भी कल की तरह दिन भर वर्षा होती रही। आज ट्रांसक्रिप्शन का कार्य पूरा हो गया। गुरु पूर्णिमा पर लिए भी एक लेख का अनुवाद करना है। लेखन कार्य में कुछ कमी आई है, पर जीवन जो रंग दिखाए, स्वीकार है। जन्मदिन की दो कविताएँ टाइप कीं।आज पतंजलि योग सूत्र पढ़ते समय कितनी सरलता से स्पष्ट हुआ कि ‘योग’ चित्त वृत्ति का निरोध कैसे है ? और जब ऐसा होता है तब द्रष्टा अपने स्वरूप में कैसे ठहर जाता है। यदि ऐसा नहीं होता अर्थात वृत्ति बनी रहती है तो द्रष्टा उसी वृत्ति का आकार ग्रहण कर लेता है।जैसे ब्रह्मा कुमारी कहती है आत्मा जब सोचती है तब मन बन जाती है। अब मन्त्र जाप का महत्व भी ज्ञात हो रहा है। मन जब एक मन्त्र का आकार ले लेता है, तब दो जाप के मध्य में द्रष्टा का अनुभव होता है। इसीलिए ॐ को परमात्मा का नाम कहा गया है। सारे शब्द ॐ में समा जाते हैं। ॐ के बाद जो मौन है, वही आत्मा का स्वरूप है। उसमें टिक जाना ही योग है। भीतर जितने भी विचार चलते हैं, वे आत्मा से ही उपजे हैं, पर उससे दूर ले जाते हैं। जैसे लहर सागर से ही उपजी है, पर उससे ऊपर उठती है तो दूर चली जाती है। 


आज जापान के पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे की नारा शहर में चुनावी भाषण देते समय मृत्यु हो गयी, उन पर एक व्यक्ति ने गोली चलायी थी। चीन में इस बात की ख़ुशी मनायी गई। गुरुजी ने भी ट्वीट किया, वह उनसे जुड़े हुए थे।  


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