Sunday, January 15, 2012

कुकर का वाल्व


कल शाम उन्होंने एक फिल्म देखी सारांश, कुछ दृश्य तो इतने भावपूर्ण थे कि महीनों तक याद रहेंगे. हेड मास्टर का रोल करने वाला अभिनेता, लड़की, और पार्वती सभी तो इतने सशक्त थे. उसके पहले वे मोटरसाइकिल पर घूमने गए, जून बहुत अच्छी तरह चलाना सीख गया है. लाइब्रेरी में साप्ताहिक धर्मयुग में राजीव-सोनिया के इंटरव्यू पढ़े, बहुत रोचक थे. नूना के छोटे भाई की शादी तय हो गयी है, उन्हें पूजा की छुट्टियों का कार्यक्रम बदलना होगा, दिसम्बर में विवाह है, पूरे दस महीनों के बाद वह घर जायेगी सबसे मिलकर बहुत खुशी होगी. बाहर लॉन में एक छोटे कद का सरदार लड़का घास काट रहा है, अभी उन्हें पूर्णकालिक माली नहीं मिला है. आज दूधवाला ज्यादा दूध दे गया है आइसक्रीम बनानी है.
आज सुबह भी पिछले दिनों की तरह नूना ने रोजमर्रा के कार्य किये, आँख में हल्का दर्द हुआ तो लेट गयी और फिर नींद खुली पौने ग्यारह बजे, ग्यारह बजे भोजन का समय है जब वह घर आता है, कल शाम कुकर का वाल्व भी उड़ गया था, दाल पतीले में बनानी थी, पूरे चालीस मिनट लगे, जून आते समय वाल्व ले आया था. उसने कुकर में लगा दिया है. कल वह भीग कर आया था तब पूर्णिमा, पड़ोस में रहने वाली लड़की यहीं बैठी थी, उसने दो पौधे लाकर दिये व अपने पेड़ के जामुन भी. उसने बताया कि कैसे वह अपने भाई को बिना बताए फिल्म देखने जाती है चुपके-चुपके अपनी सहेलियों के साथ.

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