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Thursday, November 15, 2018

सरदार पटेल की जयंती




आज धनतेरस है, कोऑपरेटिव जाकर नैनी के लिए कुकर खरीदना है तीन लिटर का, आज के दिन  दिन बर्तन खरीदना शुभ माना जाता है. अपने पास अब इतना सामान है कि लगता है, जितना जीवन बचा है आराम से गुजर जायेगा. सुबह सवा चार बजे आँख खुली, अब दिन देर से निकलने लगा है. प्रातः भ्रमण के लिए निकले तो बाहर हल्का कोहरा था. रात्रि को भीतर आग की लपट दिखी. अध्यात्म के साथ-साथ कहीं इसका संबंध स्वास्थ्य से तो नहीं है. दाहिने कान में एक रुनझुन सी ध्वनि  सुनाई दे रही है, कितने आश्चर्यों से भरा है जीवन..आज ही वे घर को कल के लिए सजा रहे हैं, वैसे भी आज से पांच दिनों का उत्सव आरम्भ हो गया है. दोपहर बाद मृणाल ज्योति जाना है. कल शाम योग कक्षा में कितना अनोखा अनुभव था, देह जैसे महसूस ही नहीं हो रही थी. कल दोपहर उस सखी से मिलने गयी जो पति के न रहने पर सदा के लिए अपने गृह स्थान को जा रही है.

आज सरदार पटेल की जयंती है और इंदिरा गांधीजी की पुण्य तिथि ! टीवी पर सुबह से विशेष कार्यक्रमों का प्रसारण हो रहा है. सरदार पटेल ने देश की एकता बनाये रखने के लिए महान योगदान दिया है. महापुरुषों के जीवन को नई पीढ़ी के सामने रखना चाहिए. १९३० में उन्होंने महिलाओं के आरक्षण की बात कही थी. गाँधी जी ने उनके बारे में कहा है कि अहमदाबाद म्युनिसिपल कारपोरेशन में कौन बैठा है यह इस बात से पता चलता है कि विक्टोरिया गार्डन में किसका राज है, जहाँ तिलक की मूर्ति उन्होंने लगाई थी. मोदी जी की वक्तृत्व क्षमता अद्भुत है. सरदार साहब के जीवन के अनोखे प्रसंग वे सुना रहे हैं. वह कह रहे हैं, हर भारतीय को अपना विस्तार करना चाहिए, यह सारा देश उनका है. उन्हें हर प्रदेश की भाषा सीखनी चाहिए, एक-दूसरे से और भी बहुत कुछ सीखना चाहिए. सुबह उठी तो कान फिर बंद था, अस्पताल गयी, मोम जम गया है, इसी वजह से भारी था. कम्प्यूटर भी खराब था जो जून इस समय मकैनिक के साथ बैठ कर ठीक करवा रहे हैं.

वर्ष का ग्याहरवाँ महीना, मौसम अभी भी गर्म है. दो हफ्ते बाद ही ठंड शुरू होगी. सुबह वे समय पर उठे, प्रातः भ्रमण के लिए गये, आकाश पर तारे चमक रहे थे. लोगों के घरों में अभी भी प्रकाश की झालरें लगी थीं. सभी को भाईदूज के संदेश भेजे. मृणाल ज्योति ले जाने के लिए उपहार एकत्र किये. कैलेंडर बदले, शरीर का वजन लिया और इस महीने आने वाले मित्र-संबंधियों के जन्मदिन व विवाह की वर्षगांठ के दिनों का पता लगाया. इस महीने दो सखियों का जन्मदिन है और एक भांजी का, ननद के विवाह की वर्षगांठ भी है. जून परसों गोहाटी जा रहे हैं, उन्हें एक मीटिंग में भाग लेना है. उसे शनिवार को मृणाल ज्योति में प्रोजेक्टर आदि स्वयं ही मैनेज करना होगा. आज कम्प्यूटर भी ठीक हो जायेगा. भाई दूज पर भेजे टीके सम्भवतः अभी नहीं मिले, छोटे भाई ने कहा, उसे भेजने की जरूरत नहीं है, पर दिल है कि मानता नहीं. दोपहर को नर्सरी जाना है, चार तरह की गोभी की पौध लानी है, हरेक के लिए दो क्यारियां हैं. शिमला मिर्च की पौध, आलू व लहसुन के बीज भी लाने को माली ने कहा है.  

उसका कान खुल गया है पर अभी भी पूरी तरह से आवाज सुनाई नहीं देती. दीवाली पर खायी मिठाई और नमकीन का असर है या मन्दाग्नि का, भीतर कफ सूख गया है, कुछ दिन लगातार नेति करने से ठीक हो जायेगा. कम्प्यूटर ठीक हो गया है, पीपीटी भी बन गया है, जून ने वीडियोज के लिंक भी उसमें डाल दिए हैं. आज शाम को एक बार अभ्यास करना ठीक रहेगा. माली वह पौध लगा रहा है जो वह कल लायी थी.

आज बृहस्पतिवार है, साढ़े तीन बजे हैं दोपहर के, जून आज गोहाटी गये हैं, सोमवार को लौटेंगे. तब तक उसे अपने समय व ऊर्जा का भरपूर उपयोग करना है. कुछ देर में बाजार जाना है, शायद ड्राइवर आ गया हो. नन्हे ने लिखा है, उसका फोन कार में छूट गया था, आज मिल जायेगा.


Friday, March 9, 2018

छोटी दीवाली



कल रात्रि फिर एक अनोखा स्वप्न देखा..एक विशाल मैदान है. नीचे बालू है और एक बड़ी से मेज पड़ी है, खुले गगन के नीचे..लकड़ी की मेज है भूरे रंग की, रंग भी स्पष्ट दिख रहा था. उसे देखते ही मन में विचार आया, इस पर लेटकर आकाश को तकना कितना सुंदर ध्यान होगा..और अगले ही पल सामने आकाश में एक सुंदर मंदिर की आकृति स्पष्ट हो गयी..और क्षण-क्षण में उसके रंग बदलते जा रहे थे. तभी अचानक कृष्ण की विशाल आकृति भी दिखी..कि पीछे से एक सखी की आवाज सुनाई दी, उसे कहा, देखो सामने कितना सुंदर दृश्य है, पर अब वहाँ धुंध थी. सब लुप्त हो गया. उस सखी ने एक अन्य सखी का नाम लेकर कहा, कि उसे भी बताया गया है यहाँ कुछ है. पर अब स्वप्न टूट गया. कृष्ण कितने वास्तविक लग रहे थे...उनके भीतर न जाने कितने रहस्य छिपे हैं ! आज जून एक दिन के दिल्ली जा रहे हैं. शाम को योग कक्षा घर पर होगी. इसी महीने उन्हें बैंगलोर भी जाना है.

एक दिन का अन्तराल.. कल सुबह वह स्कूल गयी, फिर दोपहर को कुछ देर सो गयी, दिन भर कैसे बीत गया पता ही नहीं चला. आज जून वापस आ गये हैं, ढेर सारा सामान भी लाये हैं. दीवाली की रोशनियाँ भी लगनी शुरू हो गयी हैं. दोनों माली मिलकर लगा रहे हैं. आज सुबह भी नींद देर से खुली, क्योंकि रात देर तक पढ़ती रही. अनुशासन जहाँ भंग हुआ आत्मा पर एक आवरण छा जाता है.

आज धनतेरस है. जून के गले में हल्की खराश है. वह सुबह के जॉब पर गये अभी वापस आये हैं. दोपहर का भोजन भी दिगबोई में था, कम्पनी के गेस्टहाउस में. उन्होंने अपने विभाग के सभी सहकर्मियों को परसों शाम सात बजे का समय दिया है, दीवाली के लिए. चार परिवार नहीं आ पाएंगे. एक अवकाश पर है, एक सरकारी दौरे पर, एक के परिवार में किसी की मृत्यु का शोक मनाया जा रहा है, एक की पत्नी मायके में है, सो वह भी गये हैं. सो परसों सुबह से ही उसका समय रसोईघर में गुजरेगा. पटाखों की आवाजें आनी शुरू हो गयी हैं. आज बड़ी बुआ को फोन किया तो पता चला गिरने से उन्हें कूल्हे में चोट लग गयी है. वह बहुत हिम्मत से बात कर रही थीं. ईश्वर उन्हें शक्ति दे, अभी काफी दिनों तक उन्हें अस्पताल में रहना पड़ सकता है.

आज छोटी दीवाली है. घर की सफाई का काम अब पूरा हो गया है. बाहर बरामदे में रंगोली बनानी है और स्टोर में पूजा घर सजाना है. आज दोपहर को ये कार्य करने हैं. मौसम आज सुहावना है. सुबह दीपावली के लिए एक नई कविता लिखी, कितना उमंग भरा त्यौहार है यह. छोटी बहन का फोन आया, वह परेशान थी. रिश्तेदारी निभाना इतना सरल तो नहीं है. जब तक स्वयं का स्वयं से रिश्ता नहीं बन जाता तब तक किसी और के साथ बन भी कैसे सकता है. दीवाली तो वह इस बार नहीं मना रही है, परसों उसकी परीक्षा भी है. जीवन में कितने ही क्षण ऐसे आते हैं जब वे अपने स्वभाव से हट जाते हैं, अभाव या प्रभाव में आ जाते हैं, पर जिस सदा के लिए हर पीड़ा से मुक्त होना हो उसे तो स्वभाव में टिकना सहज बनाना होगा. परमात्मा की निकटता का अनुभव उसे हर क्षण होता रहेगा तब. बंगलूरू में परसों से लगातार वर्षा हो रही है, चेन्नई में भी. इसी हफ्ते उन्हें भी वहाँ जाना है. शायद तब तक मौसम सुधर जाये.

Friday, August 4, 2017

धनतेरस और नर्क चतुर्दशी


परसों वे लौटे. उसने यात्रा विवरण लिखना शुरू कर दिया है. पिछले वर्ष वे गोवा गये थे, आस्ट्रेलिया भी, तब भी लिखा था, और अब वह सब एक स्वप्न ही तो लगता है, यह जीवन एक स्वप्न से अधिक कुछ नहीं है. आज का स्वप्न कल से बेहतर है और यकीनन कल आज से भी बेहतर होगा. सुबह भविष्य में हरे-भरे बगीचे का स्वप्न देखा, जो एक दिन साकार होगा. माली के पीछे लगना होगा और नर्सरी भी जाना होगा. एक सखी से भी सहायता मांगी है, उसने पिछले वर्ष बहुत सुंदर बगीचा बनाया था. सुबह दीदी-जीजाजी के लिए एक कविता लिखी, ननद-ननदोई को विवाह दिवस की बधाई दी और एक सखी को पिछले हफ्ते पड़ने वाले जन्मदिन की बधाई आज जाकर दी, खैर, देर आयद दुरस्त आयद ! ‘कावेरी के सान्निध्य में’ लेख पूरा हो गया है, अब तस्वीरें डालनी शेष हैं जो जून की सहायता से ही होगा. जीवन एक इस सुन्दर अवसर को सुंदर कार्यों में में ही लगाना होगा. यहाँ हर पल अनमोल है. मृत्यु का देवता द्वार पर खड़ा ही है, प्रतीक्षा रत है, बल्कि पल-पल मृत्यु के द्वार की ओर वे बढ़ ही रहे हैं. जीना है तो इसी पल में जीना होगा.

आज एक सप्ताह बाद पुनः कलम हाथ में पकड़ी है. उस दिन दीदी के लिए एक कविता लिखी थी, आज दीवाली पर कुछ पंक्तियाँ उतरी हैं. सचमुच दीवाली एक नहीं कई उत्सवों का मेला है. सफाई लगभग पूरी हो चुकी है, अभी विशेष सजावट करनी शेष है. कल धनतेरस है अथवा तो‘धन्वंतरी जयंती, शाम को बिजली की झालरें लगवानी हैं. अभी-अभी नैनी ने पूछा, आपने धनतेरस पर कुछ खरीदा है ? शाम को बाजार भी जाना है. आज से मौसम में हल्की ठंडक समा गयी है. बचपन में दादी जी कहती थीं दीवाली के बाद सर्दियां शुरू हो जाती हैं और होली के बाद गर्मियां आरंभ हो जाती हैं. सुबह स्कूल गयी, बच्चों को व्यायाम करने में जितना आनंद आता है उतना ही भजन गाने में भी. परमात्मा का नाम किसी भी तरह लिया जाये, शुभ ही करता है. पिछले दिनी बगीचे में काफी काम हुआ, नर्सरी से नये पौधे लाये गये. जून भी कोलकाता से फूलों व सब्जियों के बीज लाये हैं. ‘विश्व विकलांग दिवस’ के लिए कुछ सामान बनाना है, पुराने शादी कार्ड्स उपयोग करके नये छोटे लिफाफे बना सकती है. विभिन्न स्कूलों में जाकर उस दिन के लिए विशेष रूप से बनाये बैज भी देने हैं.

आज ‘नर्क चतुर्दशी’ है. क्लब में आज ही दीवाली उत्सव मनाया जायेगा. आज नेट नहीं चल रहा, सो ब्लॉग पर कुछ पोस्ट नहीं किया. परसों के विशेष भोज की तैयारी चल रही है. जून धीरे-धीरे सामान खरीद कर ला रहे हैं. वह सूरन के कोफ्ते की सब्जी बना रही है. इसके अलावा आलू-गोभी-मटर, बैंगन का भुर्ता, दाल माखनी, रायता, चटनी, पुलाव व पूरी बनाने की सोच रही है. कल अवकाश है, मिठाई बनाने का कुछ काम कल ही हो जायेगा. जून कोलकाता से स्नैक्स ले आये थे, कई तरह की चिक्की तथा नमकीन. बच्चों के लिए अनार व फुलझड़ी भी वे ले आये हैं, उसे शोर करने वाले पटाखे जरा भी पसंद नहीं आते. जून के दफ्तर से दीवाली के उपहार आने भी शुरू हो गए हैं. कल नन्हे से बात हुई, उसके यहाँ चार दिन का अवकाश है, पर उसे तो काम करना ही है. ईश्वर उसे सद्बुद्धि दे, उन सभी को सद्बुद्धि दे ! इससे बढ़कर कोई प्रार्थना नहीं हो सकती.