Saturday, September 29, 2018

अंतर्दीप का प्रकाश



पिछले दो-तीन दिनों से कम्प्यूटर में कुछ दिक्कत आ रही थी. आज तो कोई भी फाइल खुल नहीं रही है. उसे यदि कम्प्यूटर पर काम करना है तो जून के आने की प्रतीक्षा करनी होगी. कुछ वर्ष पहले यदि ऐसा हुआ होता तो उसकी प्रतिक्रिया होती, भगवान ने ऐसा जानबूझ कर कराया है, ताकि वह अपने समय का और अच्छा उपयोग करने का तरीका सोच सके, किन्तु अब यह ज्ञात है कि भगवान कुछ नहीं कराते, वे ही प्रतिपल अपने भाग्य की रचना करते हैं. भगवान तो हर परिस्थिति का सामना करने की शक्ति देते हैं, ज्ञान देते हैं, वह प्रेम भी देते हैं. कभी आज हल्की बदली छायी है. स्कूल बंद है, अब पूजा के बाद खुलेगा. मृणाल ज्योति में टीचर्स ट्रेनिंग का कार्यक्रम होना वाला है. सम्भवतः तीसरे हफ्ते में होगा. आज एक सखी से इस बारे में बात की. उसे भी एक दिन की वर्कशॉप का आयोजन करना है. अच्छी तरह तैयारी करनी होगी. सबसे आवश्यक है उन सबके मध्य सहयोग की भावना को पैदा करना, वे अपनी कितनी ऊर्जा एक-दूसरे की कमियां बताने में ही खर्च कर देते हैं. अपने विचारों को बदलने से ही उनका जीवन बदल सकता है. सबके भीतर अंधकार व प्रकाश दोनों हैं, कभी-कभी गुणों का प्रकाश अहंकार के अंधकार से ढक जाता है, वे जिनसे भी मिलें उनके गुणों पर दृष्टि रहेगी तो उनका जीवन भी गुणों से भरता जायेगा ! उन्हें यह मानकर चलना होगा कि वे सभी एक ही धरती के वासी हैं, एक ही देश के, एक ही राज्य के, एक ही शहर के वासी हैं. उनकी एक ही पार्टी है, वे विरोधी पक्ष के नहीं हैं, जहाँ एक-दूसरे को बिना किसी कारण के ही गलत सिद्ध करना होता है. उनका एक ही लक्ष्य है, एक ही लक्ष्य के कारण एक-दूसरे के सहयोगी हैं. कल वे देवी दर्शन के लिए जायेंगे, आज शाम को प्राण प्रतिष्ठा होगी. आश्रम में भी नवरात्रि का कार्यक्रम हो रहा है, आज वह यू ट्यूब पर देख सकती है.

पूजा का उत्सव सोल्लास सम्पन्न हो गया. आज जून पुनः दिगबोई गये हैं. तीन दिन पूर्व वे एक रात्रि के लिए वहाँ गये थे, गेस्ट हॉउस में रुके. जिस दिन पहुंचे शाम को एक-एक कर सारे पूजा पंडाल देखे. अगले दिन नाश्ता करके वापस. मौसम आज भी बादलों भरा है. उसका गला परसों से थोड़ा सा खराब है, इतवार तक पूरी तरह ठीक हो जायेगा. अगले हफ्ते काजीरंगा जाना है. स्ट्रेस मैनेजमेंट पर किसी कार्यक्रम में जून को भाग लेना है. अगले माह होने वाली टीचर्स वर्कशॉप में उसे कुछ क्रियाएं करानी हैं, जिससे टीचर्स एक दूसरे को अच्छी तरह जानें, स्वयं को जानें. वे खुद को भी कहाँ जानते हैं. उनकी कमियां और खूबियाँ, दोनों से ही अपरिचित रह जाते हैं. उसने सोचा वह दो अध्यापकों को आमने–सामने बैठकर अपनी पांच-पांच कमियां और खूबियाँ बताने को कहेगी. सभी की पीठ पर एक पेपर पिन से लगा दिया जायेगा, सभी को उसकी खूबियाँ उस पर लिखनी हैं. कार्यक्रम आरम्भ होने पर सबसे पहले वह उन्हें एक कोरा कागज देगी जिस पर उन्हें कुछ भी अंकन करना है, एक चित्र कार्यक्रम की समाप्ति पर भी.  

दीवाली आने वाली है, साल भर वे इस उत्सव की प्रतीक्षा करते हैं. दशहरा आते ही दिन गिनने लगते हैं. घर की साफ-सफाई में जुट जाते हैं. पर्दे धुलवाए जाते हैं, पुराने सामान निकले जाते हैं. घर के कोने-कोने को चमकाया जाता है. दीवाली का उत्सव कितने संदेश अपने साथ लेकर आता है.  अहंकार रूपी रावण के मरने पर ही भक्ति रूपी सीता आत्मा रूपी राम को मिलती है, वैराग्य रूपी लक्ष्मण इसमें साथ देता है और प्राणायाम रूपी हनुमान परम सहायक होता है. भक्ति को लेकर आत्मा जब लौटती है तो भीतर प्रकाश ही प्रकाश भर जाता है.

2 comments:

  1. सुन्दर विचार!

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    1. स्वागत व आभार विश्वमोहन जी !

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