बचपन में उसने एक गीत सुना था, ‘सात समुंदर पार से, गुड़ियों के बाज़ार से” भीतर कहीं ख्वाहिश थी उन बच्चों से मिलने की, जिन्होंने यह गीत गाया था। उसने जून से कहा, पता तो करें किस फ़िल्म का गाना है यह? उसे याद है, फुफेरे भाई-बहन यह गीत अक्सर गाते थे, उनके पापा वाक़ई नौकरी के सिलसिले में विदेश गये हुए थे। पता चला ‘तक़दीर’ फ़िल्म का गाना है। अच्छी लगी फ़िल्म ! ऑडिबल पर भारत के विभाजन के बारे में लिखी जसवंत सिंह की पुस्तक आगे सुनी। जसवंत सिंह पहले बीजेपी में थे पर अपने कुछ विचारों के कारण वह अलग कर दिये गये हैं। पापाजी की आँख आज ठीक थी, वह आराम से पढ़ पाये।
कल सुबह उन्हें वायनाड के लिए निकलना है।पश्चिमी घाट के पहाड़ों में केरल का एक मात्र सुंदर पर्वतीय प्रदेश ! गूगल बाबा से पूछा तो पता चला, इसका नाम वायल नादु से पड़ा है, जिसका अर्थ हुआ, धान के खेत ! यहाँ प्राचीन गुफ़ाए हैं, मसालों के बाग़ान और हरे-भरे जंगल भी। यह क्षेत्र सुंदर जल-प्रपातों और अभ्यारण्यों से घिरा है। नन्हे ने रहने के लिए ताज होटल में बुकिंग की है, कह रहा था उसके पास इसके लिए पॉइंट्स जमा हैं, आजकल घूमने का यह नया तरीक़ा है। होटल बाणासुर बांध और झील के निकट स्थित है। चित्रों में देखा तो हरी-भरी पहाड़ियों से घिरी जगह मनमोहक लग रही थी।
आज सुबह वायनाड के लिए रवाना हुए थे । हरे-भरे रास्तों और जंगलों से गुजरता हुआ रास्ता, कई झीलें भी मार्ग में आयीं। जब वे एक द्वीप पर बने वृत्ताकार होटल पहुँचे तो कमरे की सफ़ाई हो रही थी, कुछ देर बड़े से स्वागत कक्ष में बैठे, फिर बालकनी में जाकर सामने दूर तक फैली झील और उसके पीछे नीले पर्वतों को निहारते रहे। दूर झील में एक द्वीप भी दिखायी दे रहा था। नारियल के वृक्षों की क़तारें वातावरण को एक अनोखे सौंदर्य से भर रही थीं। सभी ने अपने मोबाइल निकाल लिए और कुदरत की इस छटा को कैमरे में क़ैद करने का प्रयास किया। दोपहर के भोजन में केरल का विशुद्ध पारंपरिक भोजन परोसा गया। धातु की बड़ी सी थाली में कई कटोरियों में विभिन्न व्यंजन थे, जो अपनी सुगंध और रंगों से आकर्षित कर रहे थे। स्वागत कक्ष में फूलों के विशाल गुलदस्तों के अतिरिक्त धातु से बनी हाथियों की अनेक मूर्तियों से एक दीवार पर एक कलाकृति बनी हुई थी।कमरे में पहुँचे तो फलों और चाकलेट्स से भरी दो प्लेट्स रखी थीं। कमरे के बाहर बनी बालकनी में भी बैठने की व्यवस्था थी, तथा वहाँ से झील और पर्वतों के दर्शन भी हो रहे थे। सभी कुछ देर वहीं बैठे रहे। नन्हे ने अपना ड्रोन निकाल लिया और दूर तक के पहाड़ों का चित्र लेने लगा। वहीं बैठे-बैठे उसने होटल तथा आसपास के सारे नज़ारे दिखा दिये। साफ़-सुथरे रास्ते, बगीचे और क्रिकेट खेलने के लिए बना स्थान, रोपवे पर साइकिल चलाने की सुविधा, स्वीमिंग पूल आदि सभी कुछ। इसके बाद उन सभी स्थानों की सैर की। शाम को कमरे में गये तो वहाँ जून के जन्मदिन के लिए एक केक रखा हुआ था, और बिस्तर पर फूलों से हैप्पी बर्थडे लिखा हुआ था। आने वाले स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष्य में शाम को जगह-जगह तिरंगे के रंगों वाली बत्तियों से होटल के लॉन तथा रास्ते जगमगा रहे थे।
आज सुबह योग साधना का एक सत्र भी आयोजित किया गया। नन्हा और सोनू भी उनके साथ योग सत्र के लिए गये। शांत वातावरण में सुबह की शीतल व स्वच्छ प्राणवायु को ग्रहण करके सभी के ह्रदय प्रफुल्लित हो रहे थे। जन्मदिन मनाने व नाश्ते के बाद वापसी की यात्रा आरम्भ हुई। एक झील के किनारे कुछ देर रुके फिर एक चाय बाग़ान के सामने बनी टी-फ़ैक्ट्री में कुछ समय बिताया। सड़क किनारे बने खेतों में फूलों की खेती देखते हुए देर शाम तक घर पहुँच गये।
आज आज़ादी की सत्तत्तरवीं वर्षगाँठ है। सुबह उठते ही जून ने बालकनी में तिरंगा लगा दिया था। झंडे के साथ फ़ोटो भी अपलोड की। मोदीजी का भाषण सुना। वह भारत को अगले पच्चीस वर्षों में विकसित देश देखना चाहते हैं। पच्चीस वर्षों का यह समय अमृत काल है।उन्होंने एक हज़ार वर्षों की ग़ुलामी की बात की, फिर एक हज़ार वर्षों के स्वर्णिम युग की बात की, जो वर्तमान में भारतीयों के पुरुषार्थ पर निर्भर करता है। उनका भाषण एक दूरदर्शी, आदर्शवादी, प्रेरक नेता के रूप में दिया गया है। वह सभी को देश के लिए कुछ न कुछ करते हुए देखना चाहते हैं। उनकी सरकार युवाओं के लिए मददगार सिद्ध हो रही है। महिलाओं को आगे बढ़ा रही है। वे सोसाइटी के झंडा आरोहण में भाग लेने भी गये, कई आकर्षक कार्यक्रम हुए। दोपहर को नन्हा व सोनू आ गये थे, शाम को थर्मस में चाय साथ लेकर वे सब एक झील पर गये, नन्हे ने ड्रोन उड़ाया। समय जैसे पंख लगा कर उड़ रहा है। जून ने परसों वायनाड में ‘आयुर्वेद’ पुस्तक ऑर्डर की थी, जो कल मिल भी गई। कुछ अध्याय पढ़ लिए हैं। पुस्तक बहुत अच्छी लग रही है। इसमें अपनी प्रकृति के अनुसार भोजन की सूची दी गयी है।
नन्हे ने उसके लिए एक नया माइक्रोफ़ोन भेजा है, ताकि यू ट्यूब पर पोस्ट करने के लिए वह अपनी कविताओं को रिकॉर्ड कर सके। जून का नया मैक भी पूरी तरह सेट हो गया है। आज एक फ़िल्म देखी ‘इन्सेप्शन’, जिसमें एक व्यक्ति दूसरे के सपनों में प्रवेश कर सकता है और उसके विचारों को चोरी कर सकता है।एक बार उसे किसी के अवचेतन मन में एक विचार को डालने का काम मिलता है। वह एक टीम बनाता है और जो सपनों के भीतर कई गहरी परतों में प्रवेश करते हैं।बहुत ही विचित्र सा अनुभव होता है फ़िल्म देखते समय। वास्तविकता क्या है ? सपनों में देखा संसार कहाँ से आता है? क्या मनुष्य की सोच ही उसके जीवन की घटनाओं को निर्धारित करती है? अतीत, वर्तमान और भविष्य सब गड्ड-मड्ड हो जाते हैं।
आज उन्होंने ‘ओपेनहाइमर’ फ़िल्म देखी।जो अमेरिकी भौतिकी वैज्ञानिक जे रॉबर्ट ओपेनहाइमरकी जीवनी पर बनी है। बहुत अलग सी है यह फ़िल्म। एक तरफ़ कोर्टरूम में वैज्ञानिक पर परमाणु बम के निर्माण के लिए आरोप लगाये जा रहे हैं, दूसरी तरफ़ उसे सम्मान भी मिलता है। उसे अपने कृत्य पर अफ़सोस भी है। फ़िल्म के आरंभ में वह यूरोप के एक कॉलेज में क्वांटम फ़िज़िक्स की पढ़ाई करते हैं। बाद में अमेरिका आकर इस पर और प्रयोग करते हैं। द्वितीय विश्व युद्ध में अमेरिका को यह भय होता है कि नाज़ी जर्मनी पहले परमाणु बम न बना ले, इसलिए ‘मैनहट्टन परियोजना’ का नेतृत्व ओपेनहाइमर को सौंपा जाता है। वर्षों के श्रम के बाद उनकी टीम पहले परमाणु बम का सफल परीक्षण करती है। युद्ध समाप्त करने के लिए अमेरिका जापान के हिरोशिमा और नागासाकी पर बम गिराता है। भीषण विनाश और लाखों निर्दोष नागरिकों की मृत्यु से वह व्यथित हो जाते हैं। फ़िल्म में उनके व्यक्तिगत जीवन को भी दिखाया गया है और यह भी कि वह भारतीय दर्शन व भगवद् गीता से प्रभावित थे।

अच्छी सी गुड़िया लाना
ReplyDelete....पप्पा जल्दी आ जाना
शुभकामनाएं