फूलों की बारात
आज सुबह उसने एओएल के ऐप के द्वारा करवायी जाने वाली साधना में भाग लिया, एक मयंक नामके शिक्षक फ़ॉलोअप करवा रहे थे। बहुत ही मनोयोग से और प्यार से बोल रहे थे। नन्हा लगभग ग्यारह बजे आया और शाम को चार बजे चला गया। दोपहर को जगन शक्ति द्वारा निर्देशित, भारत के मंगलयान अभियान पर आधारित एक फ़िल्म देखी, ‘मिशन मंगल’, अच्छी फ़िल्म है। विद्या बालन और अक्षय कुमार की इस फ़िल्म में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) का यह जज़्बा देखने लायक़ है, जिसमें उन्होंने बेहद कम बजट में और पहले ही प्रयास में भारत का यान मंगल ग्रह तक पहुँचाया । इसी कारण, इस समय दुनिया में नासा के साथ इसरो का नाम भी सम्मान से लिया जाता है। दोपहर बाद उसने सोसाइटी में कार चलाकर जून और नन्हे को सैर करायी।अभी भी बहुत अभ्यास की ज़रूरत है। सामने से कार आती दिखाई देती है तो एक क्षण के लिए भय लगता है, यह जानते हुए भी कि भय लगना व्यर्थ है। शाम को पापाजी से बात हुई, उन्होंने ‘अहंकार’ के बारे में ओशो के विचार बताये।उन्होंने उसकी रचनाओं को अब अधिक ध्यान से पढ़ना आरंभ कर दिया है। “अहंकार का भोजन दुख है” स्वामी अनुभवानंद जी की इस बात ने उसे कितनी बार सचेत किया है, अब भी करती है। नन्हा कल दिल्ली जा रहा है। वह प्रैक्टो का व्यापार और दायरा बढ़ाने का प्रयत्न कर रहा है।
आज सुबह वे लालबाग गये थे। स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष्य में वहाँ हर वर्ष की तरह फूलों की प्रदर्शनी लगी है। गणतंत्र दिवस की तरह इस बार भी फूलों का एक विशाल भंडार अत्यंत कलात्मक ढंग से सजाया गया है। यहाँ के ऐतिहासिक ग्लास हाउस के अंदर फूलों से विधान सौधा का मॉडल बनाया गया है। इसमें साथ लाख से अधिक गुलाब, लिली, कर्णेशन और पितुनिया फूलों का प्रयोग किया गया है। कर्नाटक के दूसरे मुख्यमंत्री कंगाल हनुमंथैया की एक शानदार मूर्ति भी स्थापित की गई थी, जिन्होंने विधान सौधा का निर्माण करवाया था। यहाँ बैंगलोर का प्राचीन इतिहास चित्रों के माध्यम से दिखाया गया है। पूरी प्रदर्शनी में २१ लाख से अधिक फूलों का उपयोग किया गया है और इस पर ढाई करोड़ का व्यय किया गया है। शाम को वे मित्र दंपत्ति के साथ गाँव की तरफ़ टहलने गये, तो बातें फूलों की होती रहीं। पापाजी के साथ आज नवनीत में पढ़े एक लेख पर चर्चा की। शाम को मृणाल ज्योति की एक ज़ूम मीटिंग में भाग लिया।
आज शाम वे दोनों एक नये रास्ते पर गये। जून आज थोड़े से चुप हैं, वह बातों को जल्दी छोड़ नहीं पाते। मन का स्वभाव ही ऐसा है, वह कैमरे की तरह है, चीजों को पकड़ लेता है। आत्मा दर्पण के समान है, साक्षी! वहाँ कुछ भी नहीं ठहरता। आज नाश्ते के बाद वे मित्र दंपत्ति के साथ मुनि नगरा डैम देखने गये। हरी-भरी छोटी पहाड़ियों से घिरी वह जगह बहुत सुंदर है। नीचे एक झील है, जहाँ तक आराम से पहुँचा जा सकता है।
आज सुबह आठ बजे ही वे नन्हे के यहाँ जाने के लिए निकल पड़े थे।उसके रसोइये ने दोसा-चटनी-सांबर आदि बहुत अच्छा बनाया था। नाश्ते के बाद आरटीओ दफ़्तर पहुँचे। वहाँ किन्हीं गिरीशजी से जून ने अत्यंत विनम्रता से बात की, उन्होंने लाइसेंस के लिए आवश्यक फार्म आदि जमा करने का तरीक़ा बताया। कुल समय पंद्रह मिनट ही लगा वहाँ, पर सड़क पर ट्रैफ़िक बहुत था, घर पहुँचते पहुँचते दोपहर हो गई।।दोपहर बाद एक पुरानी फ़िल्म देखनी आरंभ की, ‘डोली’, कितनी विचित्र कहानी है फ़िल्म की। जीवन भी तो ऐसा ही विचित्र है। शाम को बहुत दिनों बाद ध्यान किया। आजकल उनकी शामें बहुत व्यस्त हो गई हैं, जब से जून को दूर तक टहलने जाने का शौक़ हुआ है। अभी कुछ देर पहले मानव कौल की एक कहानी पढ़ी। बहुत अच्छे कहानीकार हैं वह, कहानी को पढ़ना आरंभ किया तो अंत पढ़कर ही दम लिया। उससे पूर्व श्री श्री की छोटी बहन भानु दीदी द्वारा लिखी गयी एक पुस्तक ‘पराशक्ति’ पढ़ती रही, जो ब्रह्मांड की आदिशक्ति और नारीत्व की दिव्य ऊर्जा के बारे में है। इसमें देवी के दुर्गा, कामाक्षी, सरस्वती, लक्ष्मी, महाकाली, छिन्नमस्ता, तारा और माया आदि रूपों के बारे में बताया गया है।आज उसने देवी के “तारा” रूप के बारे में पढ़ा। यह दस महाविद्याओं में से दूसरी है। पहली महाकाली है, जो वाणी पर नियंत्रण करना सिखाती है। तारा साधक के भीतर के भोलेपन का पोषण करती है।
आज सुबह भी एओएल ऐप पर योग साधना की। पंकज नामक एक शिक्षक ने बहुत अच्छी तरह से पूरा सत्र चलाया। सात बजे से आरंभ करके साढ़े आठ बजे आँख खोली। समय का पता ही नहीं चला। दिन में अनुवाद कार्य किया और दो लेखों के वर्तनी सुधार का कार्य भी। गुरुजी का ज्ञान कितना गहन है, पर कितनी सरल भाषा में वह मानव मन को छूने वाली व उसे बदलने वाली बातें कहते हैं। छोटी बहन से बात हुई, उसने एओएल का ब्लेसिंग कोर्स कर लिया है।दुबई में स्वामी ज्योतिर्मय द्वारा कराया गया। यूएई के सभी राज्यों से आये हुए लगभग पचास लोग थे। उसे अच्छा अनुभव हुआ। ध्यान और चेतना के बारे में भी उनकी बात हुई। पापाजी ने बताया उनकी आँख में दर्द के कारण पढ़ने में दिक्क्त हुई। जून ने एक दवा का नाम बताया पर डाक्टर से पूछ कर लेना ही उचित होगा। आज संसद में मोदी जी ने मणिपुर पर वक्तव्य दिया, उन्होंने विपक्ष को बहुत खड़ी-खोटी सुनायी। मणिपुर की समस्या के बारे में कल गृहमंत्री ने बता ही दिया था।आज पहली बार वह अकेले कार से पार्लर गई, पर वापसी में देखा, उसकी कार के आगे-पीछे दो गाड़ियाँ लगी हैं, जून को बुलाना पड़ा। रिवर्स करने, यू टर्न करने या गाड़ी घुमाने में अब भी झिझक रह गई है।
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