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Monday, June 22, 2015

सुनामी की लहरें


नये वर्ष में पहला कदम, मन नव उत्साह से भरा है. जीवन की यात्रा में एक नया अध्याय लिखने का वक्त आ गया है. बगीचे में गुलाब व गुलदाउदी के फूल खिल रहे हैं. इस वर्ष पहले से ज्यादा सजग रहना है, समय का सदुपयोग करना है. अपने लक्ष्यों को पुनः निर्धारित करना है तथा नियमित दिनचर्या को भी. प्रतिदिन किये जाने वालों कार्यों की एक सूची यह भी हो सकती है- क्रिया, व्यायाम, संगीत अभ्यास, बागवानी, डायरी लेखन, कविता सृजन, कम्प्यूटर पर कार्य, सेवा कार्य, शास्त्र अध्ययन, घर के किसी हिस्से की सफाई, हस्त कला का कोई कार्य, अख़बार व पत्रिकाएँ पढ़ना. सोनामी लहरों के कहर को  बरपे एक हफ्ता हो गया है पर उसका प्रभाव अभी तक ताजा है पूरे दक्षिण-पूर्व एशिया को तबाह करने वाला भूकम्प तथा तूफान एक लाख पचास हजार लोगों को मृत्यु के मुंह में झोंक गया है. लाखों लोग बेघर हो गये हैं, कितनों के पूरे जीवन की कमाई खत्म हो गयी है लोगों को इस झटके से उबरने में अभी काफी लम्बा वक्त लग सकता है. प्रकृतिक आपदा के शिकार लोग अपने भीतर की ऊर्जा को एकत्र कर पुनः अपने पैरों पर खड़े होने की कोशिश कर रहे हैं. कहाँ है वह कृष्ण ? जिसने गोकुल को वर्षा के कहर से बचाया था.

आज सुबह देर से उठे, दोपहर में वे सर्दियों की धूप का आनंद लेने घर के सामने वाले चाय बागान में घूमने गये वापसी में नन्हे के एक मित्र के यहाँ गये. नन्हा कोटा में है, उसे एक ऑब्जेक्टिव परीक्षा के दैरान बीच से उठकर आना पड़ा. फुफेरी बहन से बात की, आज फूफाजी की तेहरवीं है. योग रहस्य सीडी देखा व सुना, बाबाजी बहुत सरल शब्दों में गूढ़ बातें बताते हैं.

आज सुबह पंछियों की आवाजों के साथ नींद खुली, कोहरा घना था पर इस समय धूप खिली है. आज दोपहर एक सखी परिवार सहित भोजन पर आ रही है. वे लोग आज ही घर से आये हैं, उसकी माँ का दिल का आपरेशन पिछले माह हुआ था, जो अब स्वास्थ्य लाभ कर रही हैं. सुबह आस्था पर स्वामी रामदेव जी का योग कार्यक्रम देखा. मन में एक द्वंद्व चल रहा था, मृणाल ज्योति के लिये कार्यरत रहने वाली लेडिज क्लब की सदस्या से मिलने का वायदा किया था, पर जा नहीं जा पाई, मिलकर आई तो मन जैसे हल्का हो गया.


आज सर्दियों की पहली बरसात हो रही है, रात को भी बादल गरजते रहे. मौसम ज्यादा ठंडा हो गया है, रात को एक स्वप्न में एक घायल बच्चे को देखा. सुनामी लहरों के विनाश की खबरों से आजकल अख़बार भरा रहता है. इतन दुःख उन लोगों को झेलना पड़ रहा है. जीते जी नर्क का अनुभव उन्हें हो रहा है, पर मानव के अंदर एक ऐसी शक्ति है जो हार नहीं मानती, वह फिर से खड़ा होता है. समय के साथ घाव भी भरने लगते हैं. जीवन क्षण भंगुर है यह संत सदा से सिखाते आये हैं. 

Tuesday, November 5, 2013

गाजर का हलुआ


नव वर्ष का प्रथम दिवस ! इस समय रात्रि के नौ बजने वाले हैं, वे लोग टीवी समाचार का इंतजार कर रहे हैं. नन्हे की तबियत ठीक नहीं है, गोहाटी में उसे सर्दी लग गयी थी, इसलिए आज स्कूल नहीं गया लेकिन नये साल का स्वागत करने में वह उन दोनों से आगे रहा, कल रात वह देर तक नहीं जग सकी और पुराना वर्ष कब नया बन गया पता ही नहीं चला. जबकि नन्हे ने जगकर सारे प्रोग्राम देखे, सवा बारह बजे अपने आप टीवी बंद किया और सुबह ड्राइंग रूम भी सजाया. शाम को दो-तीन मित्र परिवारों को चाय पर बुलाया था. टीवी पर असम में पिछले दो-तीन दिनों से हुए बोडो उग्रवादियों के हमलों पर रिपोर्ट आ रही है, एकाएक ही बम विस्फोट की वारदातें बढ़ गयी हैं, उनकी यात्रा शांति पूर्ण रही, यही सोचकर संतोष हुआ उसे. आज उसने सेवइयों की खीर बनाई और उम्मीद की कि उसकी मिठास सारे साल उनके साथ रहेगी.

टीवी पर सीताराम केसरी के सीपीपी लीडर चुने जाने की चर्चा हो रही है. नन्हा आज दिन भर अस्वस्थ रहने के बाद अब ठीक लग रहा है, शाम को उसके पेट में दर्द था, वे बाजार से नींबू और सोडा लाये. आज सुबह वह देर से उठी, जून को नाश्ता देने के बाद फिर सो गयी, रात को साढ़े बारह बजे तक टीवी पर hello new year देखकर देखकर सोयी थी. पर इस रतजगे का असर दिनभर बना रहा, दोपहर को ‘उपमन्यु चटर्जी’ की किताब पढ़ती रही, फिर शाम को वे घूमने गये. जून का कहना है, उनके घर पर आ जाने के बाद उसे कोई निजी कार्य नहीं करना चाहिए, सब काम ऐसे हों जो वे दोनों मिलकर कर सकें.

जून आज फ़ील्ड ड्यूटी पर हैं, सो देर से आएंगे. नन्हा भी खेलने गया है, आज वह कल से बेहतर है. नूना भी इस वक्त हल्का महसूस कर रही है, तन और मन दोनों से हल्का, पता नहीं अपने आप ही कभी मन ख़ुशी से भर उठता है, बेबात मुस्कुराने लगता है और कभी छोटी सी बात भी मन को भारी कर जाती है. शायद हारमोंस का कोई खेल हो. उसने अपने मन को संयमित करना भी तो छोड़ दिया है. योग-ध्यान किये हफ्तों हो गये हैं. आज सुबह वक्त से नींद खुल गयी, बाहर कोहरा बेहद घना था, बाद में धूप में वह टहलने गयी थी. शाम को इतनी ठंड बढ़ जाती है कि घर में बैठकर मूंगफली खाना और टीवी देखना ज्यादा अच्छा लगता है. माली ने धनिये के बीज डाले, डायन्थस और फ्लाक्स के पौधे अच्छी गति से बढ़ रहे हैं. अभी-अभी पेड़ से एक सूखा पत्ता पीठ पर गिरा लॉन में धूप चारों ओर बिछी हुई है और नीचे घास पर ध्यान से देखने पर नन्हे कीट रेंगते हुए दिख रहे हैं, शायद वे भी धूप का आनन्द उठा रहे हैं.


कल शाम जून का स्वेटर पूरा हो गया, आज वह पहन कर भी गये हैं, कल शाम साढ़े छह बजे वे आये, तिनसुकिया से ढेर सा समान लाये, लाल गाजर और खोया भी, उनके विवाह की वर्षगाँठ पर गाजर का हलुआ जो बनाना है उनके प्रेम की तरह मीठा...कल क्लब में लंच है वे शायद ही जाएँ, कहीं दूर से फोन की घंटी की आवाज लगातार आ रही है. 

Wednesday, November 21, 2012

Cry the Pecock -Anita desai



नए वर्ष का प्रथम प्रभात भी और दिनों की तरह ही आया उसके लिए, यानि कि कोशिश करने पर भी सुबह जल्दी नहीं उठ सकी, वही सात बजे जबकि पिछली रात सोयी दस बजे ही थी, नव वर्ष की पूर्व संध्या पर प्रसारित होने वाले कार्यक्रम भी नहीं देखे, जून होते तो वे साथ-साथ देखते, दोपहर होते-होते ही वह आज भर के लिए आ गए. कल सुबह ही उन्हें जाना होगा. अब पाँच दिन बाद आएंगे. छोटे भाई का खत व फूलों भरा कार्ड मिला. नए वर्ष में उसे यह नीले रंग की सुंदर डायरी मिली है, जून के पास भी ऐसी ही डायरी है. उसके दिन अच्छे बीत रहे हैं, वे आते हैं फिर एक-दो दिन रहकर चले जाते हैं, सब कुछ भला-भला सा लगता है. कभी-कभी मन परेशान हो जाता है, छोटी-छोटी सी बात पर ही. वह सलीके से रहना नहीं जानती इसी बात पर या वह बात नहीं कर सकती या फिर इसी बात पर कि उसके बाल ठीक नहीं लग रहे हैं या फिर यही कि कमर का घेरा बढ़ता जा रहा है. शाम को नन्हे के साथ झूला पार्क में दौड़ने पर उसे कितना अच्छा लगा था हल्का-हल्का, हवा से भी हल्का. उसे अपना वक्त सही बातों में और सही ढंग से लगाना चाहिए, सब कुछ व्यवस्थित...तभी मन भी व्यवस्थित रह सकेगा. दादीजी को अब घर जाने पर वह नहीं देख पायेगी, कभी-कभी सोचकर कैसा लगता है. पिता ने उसकी स्कूल की एक सखी का पता भेजा है. उसे पत्र लिखेगी.

नन्हे का रिजल्ट आया है, उसकी लिखाई के कारण कुछ नम्बर कटे और कुछ उसके राइम्स न सुनाने के कारण, वह थोड़ा शरमाता है. उसने सोचा वह उसकी पढ़ाई पर ज्यादा ध्यान देगी, ताकि वार्षिक परीक्षा में अच्छा करे. सुबह का काम खत्म करके वह पड़ोस में गयी उनका नया टीवी देखने, पड़ोसिन ने बड़े स्नेह से स्वागत किया. दोपहर को नन्हा स्कूल से आया तो खेलने में उत्सुक था, वह उसकी बेबी अलबम में फोटो लगाने लगी, उन्होंने खाना देर से खाया, पर ठंडा हो जाने के कारण ठीक से खा भी नहीं सके, कल से वह ऐसा नहीं करेगी सोचा उसने. तीसरे जन्मदिन का फोटो नहीं मिला था, उसे याद आया तब वे बनारस में थे, जन्मदिन मना ही नहीं था, उसी साल तो उसने बीएड किया था, अब लगता है कितनी पुरानी बात हो गयी. मैडम को कार्ड भेजा है पर वे शायद ही जवाब दें, सुरभि ने भी पत्र नहीं लिखा. जीवन में कितने-कितने लोग मिलते हैं, लगता है हम उन्हें अच्छी तरह जानते हैं पर समय के साथ सब भुला देना पड़ता है.

शाम को वह देर तक ‘प्लेन और स्ट्रेट लाइन्स’ पढ़ती रही, कल उसकी छात्रा पढ़ने आयेगी. आजकल वह लाइब्रेरी से लायी अनिता देसाई की एक पुस्तक cry the pecock भी पढ़ रही है. उसकी नायिका बहुत कुछ खुद जैसी लगती है और लग रहा है कि गौतम यानि उसका पति एक दिन उसे खूब प्रेम करेगा..जैसे जून.. उसे याद आया जून के लिए उसे एक उपहार खरीदना है, उनके विवाह की वर्षगाँठ से पहले. कल ही जायेगी बाजार..पर किसके साथ?

शाम के साढ़े पांच हुए हैं, बाहर सुबह से ही बूंदाबांदी हो रही है जो दोपहर बाद से तेज हो गयी है, नन्हा और वह घर में बैठे हैं, चार बजे से ही अँधेरा छाया है कहीं जाने का सवाल ही नहीं उठता, अगर जून होते तब भी नहीं. नन्हे के साथ कारपेट पर टेनिस टेनिस खेल रही थी, वह एक घंटा पहले ही उठा है. दोपहर सोने से पूर्व उसे दो कवितायें सिखायीं, अगर वह साल भर नर्सरी में पढ़ा होता तो उसे कई याद होतीं. नन्हा उसके पास ही बैठा है कह रहा है उसकी पोयम भी डायरी में लिख दे,  humpty dumpty sat on a wall…और pat a cake …सोमनी उसकी छात्रा ऐसे मौसम में शायद न आ पाए, उसने सोचा था पर घंटी बजी, वह पढ़कर गयी पिछले माह की फ़ीस देकर, पर उसे अब उतनी खुशी नहीं होती, जून की पे बढ़ गयी है अब उन्हें किसी जरूरत के लिए सोचना नहीं पड़ता, यानि की वह अपने मन की हर इच्छा पूरी कर सकती है खरीदने के मामले में, पर अब खरीदने में भी उतना आनंद नहीं आता..संतुष्ट होना शायद इसी को कहते हैं. पर जून के लिए उसे कुछ लेना है.

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