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Thursday, September 6, 2012

फिर फिर बरसे बदली-बादल




फिर बदली छाई है आज, बस दो दिन धूप निकली, ठंड भी कितनी बढ़ गयी है. कल शाम वह थोड़ी देर के लिये उदास हो गयी थी फिर सोनू की किसी बात पर हँसी तो बस... जैसे सारी उदासी छंट गयी. उसे थोड़ा सा प्यार करो तो कैसा खुश हो जाता है, नन्हा फरिश्ता ही तो है वह उसका, कितनी प्यारी-प्यारी बातें करता है और कितने नए-नए तरीके से. आज से वह उसे कभी नहीं डांटेगी, जब तक कि बहुत ही जरूरी न हो. प्यार से सब समझ जाता है पर जब देखता है कि उसका मूड ठीक नहीं है, तो वह भी रुख बदल लेता है. आज शाम उन्हें किसी परिचित के यहाँ जाना है, वे लेने आएँगे. जून परसों आ जायेंगे घर फिर से भर जायेगा, उन्हें कहीं आने-जाने की जरूरत नहीं रहेगी, उनका छोटा सा घर और वे तीनों. देखें वह बनारस की क्या खबर लाते हैं, उसने सोचा.

कल लगभग सारा दिन उन्होंने बाहर बिताया, सुबह नौ बजे ही उसकी मित्र का फोन आ गया था, वह बारह बजे वहाँ पहुंच गयी, शाम को पांच बजे लौटी. अच्छा रहा पूरा वक्त, नन्हा खेल रहा था उनकी बेटी के साथ, एक बार भी नहीं रोया, वही रोई तीन-चार बार, जैसी की उसकी आदत है. उसकी एक दूसरी मित्र कुछ नाराज दिखी, उसे अजीब लगा, स्वार्थ के लिए मनुष्य कितना गिर सकता है, इतने वषों की मित्रता का भी उसे ख्याल नहीं आया. उसके भीतर एक उदासी छा गयी है. सब कुछ कितना पीछे छूट गया सा लगता है, लगता है यहाँ अकेले है, एकांत चाहने पर अकेलेपन से भय तो नहीं लगना चाहिए न, लगता है कोई कमी है जरूर, नहीं तो दिल में कांटे की तरह न चुभती छोटी सी बात.

परसों जून आ गए, सुबह ही आ गये थे नाईट सुपर से, दिल्ली का ट्रिप एक तरह से व्यर्थ ही गया, इतनी तकलीफें उठानी पडीं सो अलग, हाँ यह अच्छा हुआ कि बनारस होकर सबसे मिलकर आ गए. बताया कि माँ अभी भी पूर्ववत बनी हुई हैं, उदास रहती हैं, माँ का हृदय होता ही ऐसा है, या कहें स्त्री का हृदय. वे लोग अगले माह वहाँ जायेंगे. आज फिर मौसम बादलों भरा है. असम को सच ही वर्षा का घर कहते हैं. जून जब यहाँ नहीं थे, उनके विभाग के किसी अधिकारी ने बॉस को बताने की कोशिश की थी की वह इंटरव्यू के लिए गए हैं न कि घर. यह दुनिया स्वार्थी लोगों से भरी हुई है.. कल देवर की एक मित्र की चिट्ठी पढ़ी, कैसा लगता है किसी अदृश्य व्यक्ति के नाम लिखा कुछ पढ़ना, वह होता तो कितनी बातें सोचता, पढ़कर जवाब देता, फिर सिलसिला चलता रहता अब तो एक तरफा खालीपन है जो कितनी आवाजें दो, जवाब में कुछ नहीं भेजेगा. एकाएक उसे ध्यान आया आज फार्म में लगाने के लिए फोटो खिंचाने उसे स्टूडियो जाना पड़ेगा, वह लिखना छोड़ कर काम में लग गयी.