Thursday, June 23, 2011

पूर्वाभास


ज एक बार फिर तीन दिन बाद इस डायरी से बातें कर रही है. शुक्रवार की दोपहर एक अजीब स्वप्न देखा, वह दादाजी के घर पर है, सीढ़ियों से उतर रही है चाचाजी कुछ कह रहे हैं समझ नहीं पाती. फिर अचानक लगा कोई सफेद छाया छत से उतर कर उसके पास आयी और छूकर चली गयी. नींद खुल गयी और मन कितनी आशंकाओं से भर गया, और आज ही यह दुखद समाचार मिला कि  दादाजी नहीं रहे. कितना जरूरी होता है परिवार में एक बुजुर्ग का साया. शनिवार को गोल्फ फील्ड में एक चौकीदार ने उन्हें टोका तो उन्होंने निर्णय लिया कि अब से शाम को वहाँ टहलने नहीं जायेंगे. पर वे बहुत उदास थे इस घटना से. कल लगभग दो माह बाद वे तिनसुकिया गए, यात्रा अच्छी रही. आजकल नूना Elk Moll  की  Sideman and son  पढ़ रही है. वह इस समय लैब में होगा. उससे इतना प्यार करने के बावजूद नूना कभी कभी उसके प्रति विनम्र नहीं रह पाती पर वह इतना भरा हुआ है स्नेह से कि उसकी बात घुल जाती है और बाकी रहता है प्यार बस प्यार !

3 comments:

  1. जय मां हाटेशवरी....
    आप ने लिखा...
    कुठ लोगों ने ही पढ़ा...
    हमारा प्रयास है कि इसे सभी पढ़े...
    इस लिये आप की ये खूबसूरत रचना....
    दिनांक 26/10/2015 को रचना के महत्वपूर्ण अंश के साथ....
    चर्चा मंच[कुलदीप ठाकुर द्वारा प्रस्तुत चर्चा] पर... लिंक की जा रही है...
    इस चर्चा में आप भी सादर आमंत्रित हैं...
    टिप्पणियों के माध्यम से आप के सुझावों का स्वागत है....
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ...
    कुलदीप ठाकुर...


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  2. स्वागत व आभार कुलदीप जी !

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  3. purwabhas hamen kai bar aanewali paristhitiyon se avgat kara jati hai ...mujhe karib pichhle char mahine se bitiya ke liye bada dar lag raha tha ajeeb se baicheni ho rahi thi use hamesha kahti se dhyan se rahna abhi 13 october ko uska accident ho gaya jaise hi usne bataya ki mummy scooty silp ho gai jyada chot nahi aai hai maine chain ki saans li kyonki mai bahut jyada tension me thi bhagwaan ka lakh lakh shukra hai ..lagi to hai par wo surakshit hai shoulder ki haddi me crack hai patta laga hai teen saptah ka aaram bataya dr. ne .

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