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Monday, August 24, 2026

टैगोर का निबंध


टैगोर का निबंध 



आज का दिन व्यस्तता भरा बीता। ऐसी व्यस्तता, जो उन्हें आनंद से भर देती है, जैसे कोई नाव धीरे-धीरे नदी पर तिरती जा रही हो। सुबह उठे तो नित्य की भाँति दूर तक टहलने गये। चारों ओर निस्तबधता और हल्का धुँधलका ! पवन शीतल थी, उस समय कदम जैसे अपने आप ही आगे बढ़ते जाते हैं, उसने जून से कहा, वह नहीं चल रही, मात्र देह चल रही है, वह भीतर स्थिर है। उसे भीतर भी नहीं कहा जा सकता, एक ऐसी ऊर्जा है जिसका केंद्र कहीं नहीं है। आकाश में द्वादशी का चंद्रमा अपनी आभा बिखेर रहा था। चंद्रमा को देखकर सहज ही मन में आनंद की एक लहर डोल जाती है, इसीलिए चंद्रमा की तुलना मन से की गयी है, आत्मा की सूरज से और देह की धरती से ! वापस आकर छत पर लगे पौधों के सान्निध्य में साधना की। कहते हैं न, भोर सँवर जाये तो दिन अपने आप सार्थक हो जाता है। नैनी जल्दी आ गयी। उसके साथ मिलकर वे घर की साप्ताहिक सफ़ाई में जुट गये। वैक्यूम क्लीनर्स का इस्तेमाल सप्ताह में एक ही बार होता है।लगभग दो घंटे के स्वच्छता अभियान के बाद घर कैसा सुंदर लग रहा था। नूना को एओएल का अनुवाद कार्य करके भेजना था। तभी पड़ोसी परिवार मिलने आ गया, वे लोग अधिक देर नहीं रुके, शाम को उनके साथ भ्रमण के लिए जाना है, यह कहकर वे चले गये। कल जो इडली मिश्रण मिला था, उसमें कुछ हरी सब्ज़ियाँ डालकर नाश्ते के लिए अप्पम बनाये। काफ़ी पीकर वे बैंगलुरु के एक  प्रसिद्ध और व्यस्त बाज़ार ‘कमर्शियल स्ट्रीट’ जाने के लिए निकले। जून को अब व्यस्त सड़कों पर ड्राइविंग करने में दिक़्क़त नहीं होती, जैसे शुरू में होती थी। सवा घंटे में वे वहाँ पहुँच गये थे। देवेनगेरे सिल्क स्टोर से सोनू के और अपने लिए उसने कुछ वस्त्र लिए। दीवाली की तैयारी के अन्तर्गत सफ़ीना प्लाजा से कॉफ़ी टेबल कवर, एक अन्य दुकान से कुशन कवर लिए। वापस आकर झटपट लौकी, मटर व मसूर दाल डालकर तहरी बनाई।कुछ देर ऑडिबल सुनते-सुनते विश्राम किया, योग निद्रा जैसा, जिसमें देह सो जाता है, पर चेतना सजग रहती है। सुबह भी उसने कुछ देर ‘जे कृष्णामूर्ति’ को सुना था। ध्यान पर उनके विचार मन को सचेत कर देते हैं। पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार शाम को मित्रों के साथ टहलने निकले तो कुछ दूर जाते ही वर्षा आरंभ हो गई, वापस आकर एक रोचक बोर्ड गेम ‘सीक्वेंस’ खेला, जो नन्हा बहुत पहले उनके लिए लाया था। कार्ड्स से खेले जाने वाले इस खेल में पाँच टोकन की एक पंक्ति बनानी होती है, जो पहले बना लेगा, वह विजेता होगा। उन्हें भी अच्छा लगा यह खेल। जून ने ‘फ़ूडी बडी’ व्हॉट्स ऐप ग्रुप में देखकर एक सदस्या से समोसे मँगवा  लिए थे। वैसे तो वर्षा के मौसम में पकौड़े खाये जाते हैं, पर समोसे भी अच्छे लगे।    

आज इतवार की सुबह बच्चे ग्यारह बजे के लगभग आ गये थे। दोपहर के भोजन के बाद वे सब फ़ोरम मॉल गये। प्रेस्टीज समूह का यह मॉल बैंगलुरु के सबसे बड़े और शानदार मॉल्स में से एक है। उनके घर से बहुत दूर भी नहीं है। सोनू ने कहा, जॉब में अपने नये रोल के लिए अगले हफ़्ते इंटरव्यू देना है। उसके बाद उसे हफ़्ते में दो-तीन बार ऑफिस जाना पड़ेगा। उसे फॉर्मल ड्रेसेज़ लेनी थीं। उसके बाद ‘मोंटेज’ गये, जो पेंटिंग्स की एक दुकान है और शिफ्ट होने वाली है। वे लोग चालीस प्रतिशत छूट दे रहे हैं। नन्हे ने अपने घर के लिए फूलों वाली एक पेंटिंग ख़रीदी।बाद में ‘चायोज’ में शाम की चाय पी।यहाँ गुड़ की चाय भी मिलती है और कुल्हड़ वाली चाय भी, इसके अलावा हर्बल टी, ग्रीन टी आदि के साथ अनेक प्रकार की चाय मिलतीं हैं।चाय के साथ स्नैक्स की भी कोई सीमा नहीं है, अलग-अलग तरह के व्यंजन लोग यहाँ चाय के साथ मंगाते हैं। 

परसों जो लंबी सैर वर्षा के कारण नहीं हो पायी थी, आज शाम को उन्होंने मित्र दंपति के साथ की। वापसी में कुछ देर घर आकर बतकही भी चली।उनकी बड़ी बेटी के घर के पास एक झील है, कन्नामंगला झील, भविष्य में कभी वहाँ जाने की बात भी हुई। इसी हफ़्ते वे लोग बेटी के घर जा रहे हैं, जिसे कुछ दिनों के लिए विदेश जाना है, उसके कुत्ते की देखभाल के लिए उन्हें कुछ दिन वहाँ रहना होगा। वे लोग वापस आने के बाद उनके साथ योग अभ्यास करने भी आना चाहते हैं। आज नूना ने नवनीत में रवीन्द्रनाथ टैगोर का एक लेख पढ़ा, जो अद्भुत है। मानवता, प्रकृति और आध्यात्मिकता का अनूठा संगम उनके विचारों में मिलता है। संकीर्ण राष्ट्रीयता से ऊपर उनके विचार पूरे विश्व को अपना परिवार मानने की भारतीय परंपरा को पोषित करते हैं। वह कहते हैं, साहित्य का उद्देश्य आनंद की प्राप्ति और आत्मज्ञान पाना है। इस महीने के अंतिम सप्ताह में एक दिन उन्हें हिंदी नाटक देखने जाना है। नन्हे ने अगले महीने वायनाड में ताज में बुकिंग कर दी है। सितंबर के आख़िर में कोयंबटूर और ऊटी जाना है। वर्षा के बाद मौसम साफ़ होता है तो लोग यात्रा पर निकलते हैं। इस समय तो देश के कई राज्यों में बाढ़ एक कारण हालात बहुत ख़राब हैं। पापाजी ने फ़ोन पर अच्छी बातें बतायीं। उनका विश्वास दृढ़ है और परमात्मा के प्रति मन में असीम श्रद्धा है। वह आजकल आध्यात्मिक मस्ती में रहते हैं। ओशो की किताबें पढ़कर उन्हें बहुत आनंद मिलता है।

आज शाम वे पैदल ही सोमनहल्ली लेक तक गये। सूर्यास्त होने वाला था, जल में आकाश के रंगों का प्रतिबिंब बन रहा था। अनेक छोटे-बड़े श्वेत-श्याम व नीले रंग के पक्षी भी पानी में कलोल कर रहे थे। वापसी में चर्च के सामने से आये, वहाँ सांध्य प्रार्थना हो रही थी। एक विशाल मंदिर भी मार्ग में पड़ता है। दोपहर बाद ‘बेटी-बेटे’ फ़िल्म देखी, कितने सुंदर गीत हैं इसमें, सुनील दत्त का अभिनय भी अच्छा है। तीन भाई-बहन जो बचपन में एक-दूसरे से बिछड़ जाते हैं, कैसे बड़े होकर मिलते हैं ।आज जून बहुत खुश हैं, कल थोड़े से चुप थे। मन के मौसम का भी पता नहीं चलता, कब बदल जाएगा, इसलिए उसने मन के पार अपना ठिकाना खोज लिया है, जहाँ सदा बसंती  मौसम रहता है। सुबह उठते ही उसने नित्य की भाँति कुछ पंक्तियाँ लिखीं, जिन्हें बाद में टाइप किया।